नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण बदलते वैश्विक परिदृश्य और एथनॉल, हाइड्रोजन और पर्यावरण अनुकूल विमान ईंधन (एसएएफ) के मोर्चे पर देश की प्रगति के चलते भारत में अब ऊर्जा आयातक से ऊर्जा निर्यातक बनने की क्षमता है। मारुति सुजुकी की भारत में पहली ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ कार पेश किए जाने के अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में पेट्रोल, डीजल आदि पर निर्भरता आर्थिक बोझ के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है। लिहाजा स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी है। उन्होंने एथनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि अब हमारे पास ऊर्जा आयातक देश से ऊर्जा निर्यातक देश बनने की क्षमता है। भारत फिलहाल हर साल 78,000 टन पर्यावरण अनुकूल विमानन ईंधन का उत्पादन कर रहा है और अगले दो सालों में देश इसके निर्यात की स्थिति में आ सकता है। भविष्य में लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों में भी एसएएफ के इस्तेमाल की योजना है। इसका मतलब है कि भारत देश में पैदा की गई शुद्ध एनर्जी का इस्तेमाल अपने विमानों में ईंधन के तौर पर करेगा, जबकि दूसरे देशों को भी इसका निर्यात किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण देश की बड़ी समस्या है और इसमें परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी है। एथनॉल और सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना जरूरी है। देश में एथनॉल का उत्पादन एक्सेस में है और मक्का से एथनॉल बनाने के फैसले से यूपी और बिहार के किसानों की कमाई में करीब 45,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वृद्धि हुई है। गडकरी ने कहा कि मक्के की कीमत पहले 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 2,800 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है। इससे किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने में काफी मदद मिली है।



