HomeNationalधैर्य, विवेक और दूरदर्शिता सफलता की कुंजी: PM मोदी

धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता सफलता की कुंजी: PM मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हुए समझाइश दी है। उन्होंने कहा कि सुख-समृद्धि और सफलता उन्हीं लोगों को प्राप्त होती है जो हर निर्णय सोच-समझकर और पूरी समझदारी के साथ लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्यों से ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं, इसलिए हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी है, क्योंकि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता का आधार बनता है।”

इस संदेश के साथ उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया, यथा-
“सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥”
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी कार्य को बिना विचार किए नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेकपूर्ण निर्णय बड़ी समस्याओं और विपत्तियों का कारण बन सकते हैं। इसके विपरीत, जो व्यक्ति धैर्य और विवेक के साथ हर पहलू पर विचार कर निर्णय लेता है, सफलता और समृद्धि स्वयं उसका साथ देती हैं।

नवाचार और विविधता पर भी साझा कर चुके हैं सुभाषित – इससे पहले 15 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य संस्कृत सुभाषित साझा किया था, जिसमें विविधता, नवाचार और सृजनात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया गया था। उन्होंने कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति की सोच, प्रतिभा और कार्यशैली अलग होती है तथा यही विविधता नई संभावनाओं और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रधानमंत्री ने उस अवसर पर कहा था कि जैसे हर जल स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपनी विशिष्ट प्रतिभा और योग्यता के कारण अलग पहचान रखता है। इन विविध क्षमताओं के समन्वय से ही नवाचार और विकास संभव होता है।

नारी शक्ति को बताया था राष्ट्र निर्माण की आधारशिला – इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 12 जून को भी एक संस्कृत श्लोक साझा कर नारी शक्ति के योगदान को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि भारत की माताएं, बहनें और बेटियां राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और कौशल से देश का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने उस समय यह श्लोक साझा किया था—
“नारी त्रैलोक्यजननी नारी त्रैलोक्यरूपिणी।
नारी त्रिभुवनाधारा, नारी शक्तिस्वरूपिणी॥”
प्रधानमंत्री ने इसके माध्यम से महिलाओं को शक्ति, सृजन और समाज की आधारशिला बताते हुए उनके योगदान को सम्मान दिया था। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषितों के माध्यम से जीवन मूल्यों, नैतिकता, नवाचार, नारी सम्मान और सकारात्मक सोच से जुड़े संदेश साझा कर रहे हैं, जिन्हें व्यापक सराहना मिल रही है।

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