नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा भारत की विदेश नीति, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करने के साथ-साथ निवेश, रक्षा, शिक्षा और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ हुए संवाद से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।ऑस्ट्रेलिया यात्रा इस दौरे का प्रमुख केंद्र रही, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है।
चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाता है। माना जा रहा है कि इस यात्रा से व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग को और विस्तार मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे का असर क्वाड समूह की गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह की अगली शिखर बैठक को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। ऑस्ट्रेलिया के साथ वार्ता के बाद इस दिशा में नई प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
भारत में आठ ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को संचालन की मंजूरी मिलने से उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसर खुलने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया की कंपनियां भारत के बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश बढ़ा रही हैं। सड़क, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा और शहरी अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में पहले से निवेश जारी है। इसी क्रम में 2030 तक भारत में 30 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की गई है। इस निवेश का लक्ष्य पांच गीगावाट से अधिक डिजिटल अवसंरचना विकसित करना है, जिससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।
यात्रा के इंडोनेशिया चरण में दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों सहित करीब एक दर्जन समझौतों पर सहमति बनी। इनमें इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बैंगलोर का विदेशी परिसर स्थापित करने का फैसला भी शामिल है। इसके अलावा भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की आपूर्ति पर भी सहमति जताई। दोनों देशों के नेताओं ने स्वतंत्र, सुरक्षित और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।



