नईदिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा में महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न दलों से अलग होकर आए सांसदों को नए राजनीतिक समूह में शामिल होने की मान्यता दी है। सांसदों के राजनीतिक दलों के अधिकार तथा बैठने की व्यवस्था मैं परिवर्तन किया है। सदन में इन सांसदों के बैठने की व्यवस्था, संसदीय दल के नेता और मुख्य सचेतक (व्हिप) की मान्यता तय कर दी गई है ।
सबसे बड़ा बदलाव पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े सांसदों के मामले में हुआ है । तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए 20 सांसदों के नए संसदीय समूह को लोकसभा सचिवालय ने मान्यता प्रदान की है। इन सांसदों को सदन के अंदर अलग संसदीय पहचान, बैठक व्यवस्था और संसदीय गतिविधियों में पहले की तुलना में अलग अधिकार मिला है। डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को नए दल के मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता दी गई है।शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से अलग हुए सांसदों के मामले में भी अध्यक्ष ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और संवैधानिक विशेषज्ञों से राय लेने के बाद उनकी स्थिति में बदलाव किया है। इन मामलों में मूल दलों ने दलबदल विरोधी कानून के तहत लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की थी। अलग हुए सांसदों ने विलय को वैध बताया था।
लोकसभा अध्यक्ष के इन फैसलों के बाद मानसून सत्र में सदन के भीतर राजनीतिक समीकरण बदल गये हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के संख्या बल तथा संसदीय रणनीति पर लोकसभा अध्यक्ष के इन निर्णयों का प्रभाव पड़ना है। दलबदल कानून से जुड़े कुछ कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के इस निर्णय पर न्यायपालिका में चुनौती दी जाएगी। ऐसा कहा जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष के इस निर्णय का मानसून सत्र की कार्रवाई के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में मत विभाजन को लेकर एक बड़ा टकराव देखने को भी मिल सकता है।



