नई दिल्ली। राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने विधेयक का जोरदार समर्थन करते हुए इसे देश का पहला समर्पित एंटी-पेपर लीक कानूनी ढांचा बताया। गुरुवार को चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि वर्षों से पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत, मेरिट और भविष्य को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन अब सरकार संगठित पेपर लीक माफिया के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई के लिए व्यापक कानून लेकर आई है।चड्ढा ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों की आवाज सुनते हुए त्वरित कदम उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने केवल सरकार के मुखिया के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के अभिभावक की तरह छात्रों की पीड़ा को समझा और आवश्यक निर्णय लिए।
उनके अनुसार, पेपर लीक होने पर केवल प्रश्नपत्र ही नहीं, बल्कि छात्रों के सपने, आत्मविश्वास और वर्षों की मेहनत भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने नीट परीक्षा विवाद के बाद पुनर्परीक्षा, सीबीआई जांच, एसआईटी गठन, आरोपितों की गिरफ्तारी, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में प्रशासनिक बदलाव, परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा भविष्य में नीट को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने जैसे कई कदम उठाए हैं। नंदन नीलेकणी सहित विशेषज्ञों की टास्क फोर्स के गठन का भी उन्होंने स्वागत किया।सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि नया कानून पेपर लीक को संगठित अपराध की श्रेणी में रखेगा, जिसके दायरे में कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, साल्वर गैंग, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भ्रष्ट अधिकारियों तक की जवाबदेही तय होगी। कानून में 10 वर्ष तक के कारावास, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, अपराधों को गैर-जमानती बनाने, विशेष जांच दल, फास्ट ट्रैक अदालतों और समयबद्ध जांच जैसी कड़ी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।
राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल न हों छात्र-भावनाएं – छात्र आंदोलनों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध और जवाबदेही मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन उनकी भावनाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक परीक्षा केवल रैंक तय कर सकती है, किसी छात्र का मूल्य नहीं। पंजाब और कर्नाटक में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने जवाबदेही की मांग की और कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि मेरिट बनाम माफिया की लड़ाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कानून देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।



