नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों की समीक्षा करने और भारत पर पड़ने वाले इसके संभावित प्रभावों से निपटने के लिए गठित अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय समूह (आईजीओएम) की पहली औपचारिक चर्चा थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, और नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू सहित कई कैबिनेट मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए एक सक्रिय रोडमैप तैयार करना था।बैठक के दौरान सचिवों के सात अधिकार प्राप्त समूहों ने विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इसमें तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय रसद (लॉजिस्टिक्स) पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि बदलते परिदृश्य में भारत को केवल प्रतिक्रियात्मक होने के बजाय दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मध्यम से दीर्घकालिक तैयारी रखें और किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय लेने के लिए उच्च-स्तरीय समन्वय बनाए रखें। बैठक के समापन पर रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से देश को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के प्रतिकूल प्रभाव से भारतीयों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।



