करनाल: विदेश की धरती पर सुनहरे भविष्य के सपने लेकर गए एक और भारतीय युवक की जिंदगी सड़क हादसे में खत्म हो गई। हरियाणा के करनाल जिले के नीलोखेड़ी क्षेत्र के गांव सीकरी निवासी 25 वर्षीय जतिन कुमार की अमेरिका में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। जिस बेटे को परिवार ने बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ हजारों किलोमीटर दूर भेजा था, उसी बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लिए यह विश्वास करना भी मुश्किल हो रहा है कि जिस बेटे से दो दिन पहले फोन पर बात हुई थी, अब उसकी आवाज दोबारा सुनने को नहीं मिलेगी।जानकारी के अनुसार, जतिन कुमार करीब चार साल पहले अमेरिका गया था। वह कैलिफोर्निया में रहकर ट्राला चलाने का काम करता था।
परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में मेहनत करके जतिन अपने और अपने परिवार के सपनों को पूरा करेगा। इसी उम्मीद के साथ परिवार ने उसे विदेश भेजा था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन वहां से उसकी मौत की खबर आएगी और परिवार की खुशियां मातम में बदल जाएंगी। बताया जा रहा है कि हादसे से महज दो दिन पहले ही जतिन ने टेलीफोन पर घर के सदस्यों से बातचीत की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत परिवार के लिए उसकी आखिरी यादों में शामिल हो जाएगी। फोन पर बेटे की आवाज सुनने वाले माता-पिता आज उसी बेटे के अंतिम दर्शन करने के लिए तरस रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात के समय जतिन अमेरिका में ट्राला चला रहा था। इसी दौरान अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और ट्राला पलट गया। हादसा इतना गंभीर था कि जतिन की जान चली गई। घटना की सूचना मिलने के बाद गांव सीकरी में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार और परिचितों के लिए यह खबर किसी बड़े आघात से कम नहीं थी।जतिन के पिता रामपाल के लिए बेटे को खोने का दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जिस बेटे के सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद थी, उसकी पार्थिव देह को भारत लाने के लिए अब परिवार को मदद की जरूरत है। जतिन के पिता रामपाल ने बताया कि उनके भांजे का बेटा अमेरिका में ही रहता है और वह वहां से परिवार की मदद कर रहा है। परिजनों की सबसे बड़ी चिंता अब जतिन के शव को भारत लाने की है, ताकि वे अपने बेटे के अंतिम दर्शन कर सकें और गांव में उसका अंतिम संस्कार कर सकें।परिवार ने भारत सरकार से भावुक अपील की है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी करवाने और जतिन की पार्थिव देह को भारत लाने में सहायता प्रदान की जाए। विदेश में अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए ऐसी परिस्थितियां बेहद कठिन होती हैं।
एक ओर जवान बेटे को खोने का असहनीय दुख है, तो दूसरी ओर हजारों किलोमीटर दूर से उसके शव को घर लाने की चिंता भी परिवार को परेशान कर रही है। जतिन की मौत ने एक बार फिर उस पीड़ा को सामने ला दिया है, जिसका सामना विदेश में रहने वाले भारतीयों के परिवारों को करना पड़ता है। बेहतर रोजगार और उज्ज्वल भविष्य की तलाश में विदेश जाने वाले युवा कई बार दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। करनाल जिले के भी कई युवकों की विदेशों में हुए हादसों में जान जा चुकी है। जतिन की असमय मौत ने एक परिवार के सपनों को उजाड़ दिया है। गांव सीकरी में हर आंख नम है और परिवार को अब केवल यही उम्मीद है कि सरकार की मदद से बेटे की पार्थिव देह जल्द भारत पहुंचे, ताकि माता-पिता अपने लाडले को अंतिम विदाई दे सकें।



