नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान में देरी के बीच एक बार फिर विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।परिसीमन का मुद्दा लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। प्रस्तावित बदलावों का आधार जनसंख्या और निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा। दक्षिण भारतीय राज्यों की ओर से पहले ही यह चिंता जताई जाती रही है कि परिसीमन के बाद संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है। वहीं, केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि सीटों के संभावित पुनर्गठन में सभी क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसके लागू होने की प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जुड़ी हुई है। इसी वजह से दोनों मुद्दे राजनीतिक और संवैधानिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े माने जा रहे हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सामने इन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने की चुनौती भी है। संविधान संशोधन विधेयकों के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। विपक्षी दल परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों के प्रतिनिधित्व और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग सवाल उठाते रहे हैं। फिलहाल, विशेष सत्र को लेकर अंतिम निर्णय और विधेयकों की संभावित समयसीमा पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।



