नई दिल्ली। देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, विशेषकर ई20 ईंधन, और इसके कारण वाहन के माइलेज पर पड़ने वाले कथित नकारात्मक प्रभावों को लेकर इन दिनों खूब बहस छिड़ी हुई है। इसी मुद्दे पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एक सामान्य कार मालिक अपनी गाड़ी के सही माइलेज का आकलन स्वयं नहीं कर सकता। उनके अनुसार, वाहनों के माइलेज की सटीक जाँच के लिए अधिकृत डीलरशिप पर उपलब्ध विशेष मशीनरी का उपयोग करना आवश्यक है। यह बयान ऐसे समय आया है जब बड़ी संख्या में उपभोक्ता ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद अपनी गाड़ियों के माइलेज में गिरावट की शिकायत कर रहे हैं।
एक साक्षात्कार के दौरान, पत्रकार ने अपनी 2023 मॉडल की कार का उदाहरण देते हुए गडकरी से सवाल किया। माइलेज घटकर करीब 7 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है। इस पर गडकरी ने जोर देकर कहा कि न तो एक आम व्यक्ति और न ही कोई पत्रकार, डैशबोर्ड की रीडिंग के आधार पर सही माइलेज की जाँच कर सकता है। उन्होंने दोहराया कि माइलेज का सटीक मापन केवल वाहन निर्माता कंपनी के आधिकारिक डीलर के पास मौजूद विशिष्ट मशीनों से ही संभव है।यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने स्वयं हाल ही में यह स्वीकार किया था कि कुछ गाड़ियों में ई20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन दक्षता में तीन से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक दस्तावेज़ में भी इस बात को स्वीकार किया गया था कि कुछ वाहनों में माइलेज कम हो सकता है, लेकिन यह भी कहा गया था कि वाहन के प्रदर्शन का आकलन केवल इस एक कारक के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। सरकार ने 1 अप्रैल से देश भर में ई20 पेट्रोल की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है, जिसके बाद से यह विवाद और गहरा गया है। आम जनता में ई20 पेट्रोल को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, खासकर माइलेज और वाहन के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर। जबकि सरकार एथेनॉल मिश्रण को पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानती है, उपभोक्ताओं के लिए उनकी गाड़ी की परिचालन लागत पर इसका प्रभाव एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। गडकरी का यह बयान इस बात पर प्रकाश डालता है कि माइलेज के मापन की सटीकता को लेकर आम उपभोक्ता और विशेषज्ञ राय में एक स्पष्ट अंतर है।



