नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में मौसम ने करवट ले ली है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया है। वहीं, उत्तराखंड में सुबह का तापमान दो दिनों के भीतर 17.7 डिग्री से गिरकर 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। राजस्थान में बारिश के कारण सुबह और शाम के समय ठंडक बढ़ी है तथा अधिकतम तापमान में छह डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है।उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है।
राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में बाढ़ से तीन लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। गोमती नदी का जलस्तर घटा है, लेकिन 21वें दिन भी घरों में पानी भरा हुआ है। जानकारी अनुसार हिमाचल प्रदेश में बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रदेश का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 4.3 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया। मौसम में आए इस बदलाव के कारण प्रदेश में ठंड का असर बढ़ गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद तापमान में और गिरावट की स्थिति बनी हुई है।
दो दिन में 8.7 डिग्री गिरा तापमान – उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते ठंड बढ़ गई है। प्रदेश में शनिवार सुबह तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दो दिन पहले तक यह 17.7 डिग्री सेल्सियस था। इस तरह दो दिनों में सुबह के तापमान में 8.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। मौसम में अचानक आए बदलाव का असर जनजीवन पर भी पड़ने लगा है।
राजस्थान में बारिश से बढ़ी ठंडक – राजस्थान में बारिश के बाद सुबह और शाम के मौसम में ठंडक बढ़ गई है। मौसम में बदलाव के चलते अधिकतम तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अलवर में अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि माउंट आबू में पारा 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है।
आंधी और बारिश का दौर जारी – उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर जारी है। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। यहां तीन लाख से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है। हालांकि, गोमती नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन जलभराव की समस्या से लोगों को अब तक राहत नहीं मिली है। बाढ़ के 21वें दिन भी कई घरों में पानी भरा हुआ है। इससे प्रभावित परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नदी का जलस्तर कम होने के बावजूद घरों से पानी नहीं निकलने के कारण क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित बना हुआ है।



