HomeNationalसांसद राघव चड्ढा ने उठाई राइट टू रिकॉल की मांग 

सांसद राघव चड्ढा ने उठाई राइट टू रिकॉल की मांग 

नई दिल्ली । भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही को एक नए स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को सदन में राइट टू रिकॉल (जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार) का मुद्दा उठाकर नई बहस छेड़ दी है। शून्यकाल के दौरान अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने तर्क दिया कि देश के मतदाताओं के पास न केवल अपनी पसंद का नेता चुनने की शक्ति होनी चाहिए, बल्कि उम्मीदों पर खरा न उतरने वाले प्रतिनिधियों को उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले पद से हटाने का अधिकार भी मिलना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह व्यवस्था मतदाताओं को सही मायने में अधिकार संपन्न बनाएगी और राजनेताओं के भीतर जनता के प्रति निरंतर जवाबदेही का भाव पैदा करेगी।राइट टू रिकॉल का अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत यदि किसी क्षेत्र के मतदाता अपने निर्वाचित प्रतिनिधि के काम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे एक तय प्रक्रिया के जरिए उसे पद से बेदखल कर सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था में एक बार चुनाव जीतने के बाद प्रतिनिधि पांच साल के लिए निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यह अधिकार आने के बाद उन्हें हर वक्त जनता के प्रति जवाबदेह रहना होगा। चड्ढा ने इस विचार को पुख्ता करने के लिए देश के सर्वोच्च पदों का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा कि जब भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों को हटाने के लिए महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है, तो फिर जन प्रतिनिधियों को हटाने का अधिकार सीधे जनता के पास क्यों नहीं होना चाहिए?हालांकि, इस व्यवस्था के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी अक्सर चिंताएं जताई जाती रही हैं। इन आशंकाओं को दूर करते हुए सांसद ने कुछ सुरक्षात्मक उपायों का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी प्रतिनिधि को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 35 से 40 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर अनिवार्य होने चाहिए, ताकि केवल राजनीतिक द्वेष के कारण इसे हथियार न बनाया जा सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments