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भाखड़ा डैम की स्टोरेज क्षमता 26% और पोंग डैम की क्षमता 14% हुई कम, बाढ़ के खतरे को रोकने के लिए जलाशयों की समय पर डीसिल्टिंग की मांग

चण्डीगढ – पिछले कुछ सालों में भारी मात्रा में गाद जमा होने की वजह से, राज्य के बड़े बांधों (डैम) की जल भंडारण क्षमता भारी गिरावट आई है। भाखड़ा बांध की कुल क्षमता 9.27 बिलियन क्यूबिक मीटर होने के बावजूद भारी गाद के कारण इसकी क्षमता लगभग 26% घट चुकी है। गोबिंद सागर झील में भी 100 से 200 फुट तक गाद जमा हो चुका है। यही नहीं अत्यधिक गाद जमा होने के कारण पोंग डैम की क्षमता में भी 14% की कमी आई है। इस गाद के कारण से बाँध की पानी रोकने की क्षमता कम हो रही है, जिससे माध्यम  वर्षा भी बाढ़  का कारण बन सकती है। नदी की बनावट में बदलाव और नदी के रास्तों के बदलने से बाढ़ की स्थिति और गंभीर  हो गई है, जिससे पंजाब में बाढ़ के टिकाऊ मैनेजमेंट के लिए एक साइंटिफिक रोडमैप की ज़रूरत है।

यह जानकारी राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद के चल रहे बजट सत्र के शून्य काल के दौरान पंजाब में बार-बार आने वाले बाढ़ के संकट पर चिंता जताते हुए दी। संसद के उच्च सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए और राज्य में बाढ़ संकट से निपटने के लिए व्यापक योजना की आवश्यकता पर जोर देते हुए सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा, “पंजाब को साल दर साल डूबने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए उन्होंने बाढ़ के संकट से पूरी तरह निपटने के लिए उच्च स्तरीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन करने की मांग की। कमेटी को पंजाब में बाढ़ के टिकाऊ मैनेजमेंट के लिए एक साइंटिफिक रोडमैप तैयार करने के लिए स्थिति का डिटेल्ड असेसमेंट करना चाहिए। इसे नदियों, जलाशयों से समय पर गाद निकालने, तटबंधों को मज़बूत करने और असरदार नदी मैनेजमेंट के लिए राज्यों के बीच तालमेल को मज़बूत करने के लिए एक कानूनी तौर पर ज़रूरी सिस्टम बनाने पर भी कामकरेगी।”

बाढ़ के संकट और राज्य पर इसके हानिकारक प्रभाव के बारे में बताते हुए,सांसद संधू ने कहा, “पंजाब में बाढ़ कभी-कभार आने वाली प्राकृतिक आपदा बल्कि एक व्यवस्थित विफलता और वार्षिक त्रासदी है जो सालों से सामान्य जीवन में रुकावट डाल कर राज्य को गंभीर मानवीय, आर्थिक और पर्यावरण का नुकसान पहुँचा रही है। पंजाब ने आज़ादी से लेकर अब तक 10 से अधिक भयानक बाढ़ों का सामना किया है। 2023 की बाढ़ में 50 और 2025 में भी 37 से अधिक लोगों ने अपनी जान गवाई, जबकि लगभग 4 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए तथा कई लोग बेघर हो गए।” बाढ़ से कृषि को हुए भारी नुकसान के बारे में बोलते हुए सांसद ने कहा,“पंजाब की 3 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषिभूमि बाढ़ के चलते शतिघ्रस्त हुई। 3 लाख से अधिक पशुधन और 6 लाख से अधिक पोल्ट्री पक्षियों का नुकसान हुआ। सड़कों, अस्पतालों और स्कूलों जैसी महत्वपूर्ण सामुदायिक सुविधाएं भी प्रभावित हुई है।”

क्षेत्र के डैम की स्टोरेज क्षमता के मुद्दे पर बोलते हुए सांसदने कहा, “आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भारी गाद के कारण डैम की स्टोरेज क्षमता में कमी आना है।सांसद सतनाम सिंह संधू ने राहत और बचाव कार्यों को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह कार्य सराहनीय हैं, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। बाढ़ के मूल कारणों में डैमों में बढ़ती गाद, बांधों की लगातार गिरती क्षमता, अवैध खनन और प्राकृतिक जल निकासी चैनलों पर अतिक्रमण, नदियों की आकृति में आए बदलाव और नदी के मार्ग का अनियंत्रित तरीकों से बदलना स्थिति को और भी गंभीर बना रहा है। इसके अलावा, राज्यों के बीच तालमेल की कमी भी स्थिति को गंभीर बना रही है।पंजाब में बाढ़ के दौरान किए राहत कार्यों और  पुनर्वास के लिए 1,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।  उन्होंने बचाव अभियान चलाने में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स(एनडीआरएफ), स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ), सेना और एयर फोर्स को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर 20,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।”

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