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स्पीकर ओम बिरला को हटाने का विपक्ष का प्रस्ताव खारिज, लोकसभा में ध्वनिमत से फैसला

नई दिल्ली । लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया है। इस दौरान विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया, वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने इससे पहले विपक्ष पर करारा हमला भी बोला। पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने का फैसला सुनाया। लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी और विपक्ष पर कई आरोप लगाए। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि हम जब भी बोलने को होते हैं हमे रोका-टोका जाता है। उन्होंने कहा कि यह चर्चा लोकतंत्र और स्पीकर की भूमिका पर है। कई मौकों पर मेरा नाम लिया गया। हर समय हमें बोलने से रोका गया। राहुल ने कहा कि आखिरी बार बोलते हुए मैंने प्रधानमंत्री की ओर से कॉम्प्रोमाइज का मुद्दा उठाया था। सदन देश का प्रतिनिधित्व करता है।

पहली बार विपक्ष के नेता को नहीं बोलने दिया गया। पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड हैं। राहुल के इतना बोलने पर रविशंकर प्रसाद ने कहा- नेवर…नेवर। पीएम मोदी का भारत कभी कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं होगा। इनको बेसिक समझदारी भी नहीं है। स्पीकर ने कई बार चेयर घेरी गई, कागज फेंके गए, लेकिन वह मुस्कराते रहे। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना अफसोसजनक, क्योंकि स्पीकर किसी एक दल के नहीं है, वे सभी के हैं। स्पीकर को नियमों के उल्लघंन पर रोकने और टोकने का अधिकार है।चर्चा के दौरान अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये कौन लोग हैं जो राम को काल्पिनक बताते हैं। टी-20 वल्र्प कप जीतने पर भारतीय टीम के लिए मेज तक नहीं बजा सके हैं। राहुल को लगता है कि पीएम का पद तो उनके लिए ही है।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश माओवादतंत्र से नहीं लोकतंत्र से चलता है। हमारे सदस्य को संसद के बाहर गद्दार कहा गया था। हम तो आफगानिस्तान से अपने लोगों को वापस लाए। इन लोगों ने सिखों के गले कटवाए। सरेंडर आप लोगों ने किया था चीन को 38 हजार स्क्वयार मीटर जमीन देकर। हमने तो अपने सेना को खुली छूट दी। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ जाकर खड़े हो गए थे। वोटी-वोटी नोचने वाला बयान इनके नेता ने दिया। राहुल गांधी प्रस्ताव पर साइन नहीं करते, प्रियंका जी भी नहीं करतीं।

सरकार ने देश को हाईजैक किया: वेणुगोपाल
वेणुगोपाल बोले- सरकार ने देश को हाईजैक किया है। ये देश की संस्थाओं का गलत यूज कर रहे हैं। ईडी, सीबीआई और दूसरी जांच एजेंसियों का गलत यूज कर रहे हैं। ये स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव नहीं है। ये देश और सदन की डिग्निटी बचाने का प्रस्ताव है। वेणुगोपाल ने कहा- देश के पीएम सदन में क्यों नहीं है। वे स्पीकर के अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए क्यों नहीं आए हैं। हमारे पीएम नेहरू हमेशा सदन में मौजूद रहते थे। आज पीएम मोदी कहां है।वेणुगोपाल बोले- एलओपी को एपस्टीन फाइल्स पर नहीं बोलने दिया गया, इंडिया-यूएस ट्रेड पर नहीं बोलने दिया गया। सरकार ने सरेंडर क्यों किया है। अमेरिका कहता है कि भारत रूस से 30 दिन तक पेट्रोल ले सकता है क्या है सरेंडर करना नहीं है। भारत के पीएम उनसे आदेश क्यों ले रहे हैं। वेणुगोपाल ने कहा- नेता विपक्ष पार्लियामेंट्री सिस्टम का हिस्सा हैं। जब वह खड़े होते हैं, जब वह बोलते हैं तो उन्हें सुना जाता है। लेकिन वह जब भी खड़े होते हैं तो उनका माइक बंद कर दिया जाता है। ऐसे कैसे हो सकते है।

विपक्ष के नोटिस में कई गलतियां, स्पीकर ने ठीक कराईं: शाह
अमित शाह ने कहा, स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव के नोटिस में 2026 की जगह 2025 लिखा था। जब विपक्ष के ध्यान में लाया गया तो उन्होंने नोटिस वापस ले लिया। दूसरे नोटिस में सिर्फ गौरव गोगई के रियल साइन थे। सभी विपक्षी सांसदों को जेरोक्स साइन थे। ऐसे में नोटिस खारिज हो सकता है। लेकिन इनमें इतनी गंभीरता नहीं है कि नोटिस नियमों के हिसाब से लाएं। फिर भी स्पीकर के ऑफिस ने विपक्ष को मौका दिया कि गलतियां है। सुधार लो। ये सदन में गंभीरता की बात करती हैं। मोरल ग्राउंड के आधार पर ओम बिरला ने दो-दो बार प्रस्ताव सुधारने का मौका दिया।

स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आम घटना नहीं – गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर का महत्व सदन, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। जब आप उनकी निष्ठा पर सवाल उठाते हैं, तो आप लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठाते हैं। आप पीएम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाइए, हम नहीं कहेंगे की यह अफसोसजनक है। लेकिन स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आम घटना नहीं है।

ये सदन कोई मेला नहीं, इसके नियमों के अनुसार चलना होता है – अमित शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए स्पीकर मध्यस्थता करवाते हैं। ये सदन कोई मेला नहीं है। इसके नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जब आप सदन के नियमों को नजरअंदाज करोगे, तो स्पीकर का दायित्व है कि इसे रोके और टोके। ये अधिकार ये नियम हमने नहीं बनाए। ये नेहरू के समय में बने हैं। अधिकारों के संरक्षण के लिए हम सहमत हैं लेकिन नियमों का क्या। सबको नियमों के अनुसार बोलना पड़ेगा, चाहे वह कोई भी हो। मतभेद तो सभी सदस्यों के हो सकते हैं, लेकिन स्पीकर के फैसलों पर शक नहीं कर सकते। कभी हमें अनुकूल नहीं लगेगा, कभी विपक्ष को अनुकूल नहीं लगेगा। लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना घोर निंदनीय है। जिसको मध्यस्थता करनी है, उसकी निष्ठा पर आप सवाल करते हो। ये बहुत अफसोस की बात है।

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