नई दिल्ली । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधिनिर्माताओं से राष्ट्रहित के मुद्दों पर दलगत भावना से ऊपर उठकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने विधानमंडलों की बैठकों की संख्या में कमी और विधायी निकायों में सदस्यों के अमर्यादित आचरण पर क्षोभ व्यक्त किया। भुवनेश्वर, ओडिशा में संसद और राज्य विधानमंडलों की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के सभापतियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, बिरला ने कहा कि विधानमंडलों में चर्चा-संवाद का स्तर कम होना चिंता का विषय है।
बिरला ने कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित वर्गों तक सही मायने में पहुँचाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकारी धन के प्रभावी उपयोग और सुदृढ़ निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया और समावेशी विकास को गति देने में वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य वंचित वर्गों के उत्थान के उद्देश्य से सामाजिक कल्याण पहलों के लिए हर साल पर्याप्त संसाधन आवंटित किए जाते हैं । समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, बिरला ने कहा कि समितियां संसदीय लोकतंत्र का मुख्य आधार हैं। सदन में चर्चा पर हावी होने वाली राजनीतिक बाध्यताओं के विपरीत, समितियाँ दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर मुद्दों की विस्तार से जाँच करती हैं और आम सहमति पर आधारित सिफ़ारिशें करती हैं।



