Health News : शारीरिक सक्रियता की कमी पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न और मानसिक थकान जैसी समस्याओं को जन्म देती है। भागदौड़भरी जिंदगी में अनियमित आहार और एक ही जगह देर तक बैठकर काम करने, जिसे डेस्क जॉब भी कहा जाता है, से शरीर कई रोगों का शिकार हो रहा है। इन चुनौतियों के बीच, डोलासन एक ऐसी योग मुद्रा है जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूती देने और इन समस्याओं से राहत दिलाने में अद्भुत रूप से सहायक है। यह एक हठ योग मुद्रा है, जो दो शब्दों डोल (झूलना) और आसन (योग मुद्रा) से मिलकर बनी है। इसके नियमित अभ्यास से थकान, सिरदर्द और तनाव से राहत मिलती है, जिससे आप फिर से तरोताजा महसूस करने लगते हैं। इस आसन को करने के दौरान शरीर के ऊपरी हिस्से को घड़ी के पेंडुलम की तरह आगे-पीछे झुलाया जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी डोलासन की महत्ता पर जोर दिया है।
उनके अनुसार, डोलासन (जिसे पेंडुलम या झूलने की मुद्रा भी कहते हैं) एक गतिशील योगासन है, जो शरीर के लचीलेपन, रीढ़ की मजबूती और संतुलन को बढ़ाने में मदद करता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय तक बैठे रहते हैं। यह आसन पेट और कोर की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जो बेहतर मुद्रा और रीढ़ को सहारा देने के लिए आवश्यक हैं। साथ ही, यह पीठ के निचले हिस्से में कोमल खिंचाव देकर दर्द को कम करता है। डोलासन हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे की नसें) को टोन करता है, जिससे पैरों में मजबूती और लचीलापन आता है। यह रीढ़ की नसों को सक्रिय करके रीढ़ को अधिक लचीला बनाता है, जिससे गतिशीलता में सुधार होता है। यह आसन न केवल शारीरिक स्तर पर, बल्कि मानसिक स्तर पर भी लाभ पहुंचाता है, क्योंकि यह मन को शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। इसे करना बेहद आसान है।
सबसे पहले, अपने दोनों पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा अधिक खोलकर सीधे खड़े हो जाएं। गहरी सांस लेते हुए अपनी दोनों कलाइयों को आपस में इंटरलॉक करें और हाथों को अपने सिर के पीछे रखें। अब, सांस छोड़ते हुए अपने धड़ (पेट के ऊपरी हिस्से) को घड़ी के पेंडुलम की भांति, धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से, दाएं से बाएं और फिर बाएं से दाएं झुलाएं। इस दौरान शरीर का ऊपरी हिस्सा लगातार गति करता रहता है। रोजाना 1-2 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करने से शरीर में हल्कापन और नई ऊर्जा का संचार महसूस होता है। शुरुआत में इस आसन को करने में साधक को थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे वे इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएंगे, यह धीरे-धीरे आदत बन जाएगी। हालांकि, सिर्फ योगासन करने के साथ-साथ साधक को संतुलित आहार का सेवन भी करना चाहिए, तभी किसी भी आसन को करने का पूर्ण लाभ मिलता है।



