चैन्नई। तमिलनाडु के करुर की रैली में मची भगदड़ के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि हाईवे राजैनिक रैलियां और रोड शो के लिए नहीं है। इस पर तत्काल रोक लगाएं। अदालत ने यह आदेश 4 जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। इनमें अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की रैली के दौरान भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश मांगे गए थे। यह पाबंदी तब तक लागू रहेगी जब तक ऐसे आयोजनों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार नहीं हो जाती।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि जब तक एसओपी तैयार नहीं हो जाती, तब तक राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर निर्धारित स्थानों को छोड़कर किसी भी सभा की इजाजत नहीं दी जाएगी। जज सेंथिलकुमार ने तमिलनाडु पुलिस की हाल ही में विजय के कैंपेन बस से संबंधित दुर्घटना को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने पूछा कि क्या कोई मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा, केस दर्ज करने से क्या रोकता है? भले ही कोई शिकायत न दी जाए, पुलिस को स्वयं मामला दर्ज करना चाहिए।
जमानत याचिका खारिज, एसआईटी गठित – हाई कोर्ट ने टीवीके के दो सीनियर पदाधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। ये याचिकाएं 27 सितंबर को करूर में पार्टी की रैली में हुई भगदड़ के सिलसिले में दायर की गई थीं। अदालत ने टीवीके के प्रदेश महासचिव बुस्सी एन आनंद और उप महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्हें घटना के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी में नामजद किया गया है।मद्रास उच्च न्यायालय ने भारतीय पुलिस सेवा के सीनियर अधिकारी असरा गर्ग के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया, जो 27 सितंबर को प्रदेश के करूर में विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ की जांच करेगा।



