नई दिल्ली – मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में रजिस्ट्री ने अनेक खामियां बताई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन खामियों में निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा करना, दस्तावेजों के कुछ पन्नों का गायब होना और कई पन्नों का स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं होना शामिल है। रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति भी मांगी है।
रिपोर्ट के अनुसार, याचिका से जुड़े नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से इसे दायर करने के लिए लिखित सहमति भी उपलब्ध नहीं थी। रजिस्ट्री ने इन कमियों को दूर करने के लिए संबंधित वकील को सूचित किया है। हालांकि, ये प्रक्रियागत खामियां हैं और इनका उल्लेख अपने आप में याचिका के मूल आरोपों पर अदालत के किसी निष्कर्ष को नहीं दर्शाता। यह याचिका 12 अक्टूबर को राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर की गई थी। इसमें भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं की आशंका है। विपक्षी नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने की मांग – याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, समिति को निर्धारित समय सीमा के भीतर एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उसमें किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करना चाहिए, ताकि प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।



