राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित हीरक जयंती समारोह में सम्मिलित हुईं
चंडीगढ़ – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में राज्य के गठन के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हीरक जयंती समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर, उन्होंने हीरक जयंती के लोगो को भी लॉन्च किया। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित रहे।अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति के विकास में हरियाणा के इस क्षेत्र का उल्लेखनीय योगदान रहा है। गीता का अमर संदेश इसी धरती से समस्त विश्व में फैला था। भारतीयता को गौरव प्रदान करने वाली इस पुण्य भूमि को राष्ट्रपति ने प्रणाम किया। उन्होंने भारत की प्रगति-यात्रा के अनेक आयामों में सार्थक योगदान देने वाले हरियाणावासियों को भी बधाई दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान कृष्ण के निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश सारे विश्व में फैलाने वाली इस धरती ने आधुनिक युग में भी मानवीय पराक्रम के अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इसकी संतानों ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सामाजिक परिवर्तन, लोकतंत्र, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्रों में सार्थक योगदान किया है। राव तुलाराम का अदम्य साहस, दीनबंधु सर छोटूराम की किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्धता, पंडित नेकीराम शर्मा की राष्ट्रसेवा और दादा लखमीचंद की लोक-सांस्कृतिक साधना हरियाणा की अमूल्य विरासत हैं। उन्होंने कहा कि बीसवीं सदी में हरियाणा के प्रथम शहीदों में गिने जाने वाले अंबाला के कांशीराम जी सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल के साथ मिलकर गदर पार्टी स्थापित करने वालों में से एक थे। भारत लौटने के लगभग एक वर्ष बाद ब्रिटिश सरकार ने 1915 के इसी नवंबर माह में उनको फाँसी दे दी थी।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शहरों के साथ ही यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों ने भी बढ़-चढ़ कर सहभागिता की थी। कम उम्र की बेटियाँ भी इन आंदोलनों में खुलकर सामने आती थीं।इसी संदर्भ में एक तथ्य का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रेवाड़ी की एक 12 वर्ष की बेटी की 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में निर्भीक सहभागिता की बात रिकॉर्डों में है। नमक कानून तोड़ने के लिए इस बेटी ने अपने बचपन की पूरी बचत लगाकर नमक खरीदा। प्रतिदिन दो पैसे जोड़कर उसने वर्षों में जितने पैसे जोड़े थे, वह सम्पूर्ण पूँजी उसने इस आंदोलन को अर्पित कर दी। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि इस प्रेरक प्रकरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करके समाज के सामने लाया जाए। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हरियाणा की इसी धरती पर जन्मी सुचेता कृपलानी ने भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनकर नया इतिहास रचा। नवगठित हरियाणा राज्य की प्रथम विधानसभा अध्यक्ष के रूप में शन्नो देवी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की अग्रणी भूमिका का उदाहरण प्रस्तुत किया।
इसी राज्य की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक पहुँचकर अनगिनत बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है।राष्ट्रपति ने महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार की सजगता और संवेदनशीलता के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि राशन डिपो के आवंटन में महिला आरक्षण, पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व और ट्रांसजेंडरों के लिए Welfare Board का गठन जैसी पहलें बड़े उदाहरण हैं। महिला सशक्तीकरण के अनेक आयामों में हरियाणा ने पिछले लगभग एक दशक में विशेष प्रगति की है। जनवरी 2015 में, हरियाणा के पानीपत से ही ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया था। यह अभियान महिला सशक्तीकरण की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई है। बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।
जन्म के समय बालकों के मुकाबले बेटियों का लिंगानुपात 2014 में 871 था, यह बढ़कर नवंबर 2025 में लगभग 915 हो गया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य और केन्द्र सरकार के समन्वित प्रयासों से यह अनुपात समानता का स्तर प्राप्त कर लेगा और राज्य में महिला स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी लगातार हो रहे सुधार की गति बढ़ेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि उपयुक्त प्रोत्साहन मिलने के कारण प्रदेश की बेटियों ने अनेक खेलों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है। मनु भाकर, स्वीटी बूरा, जैस्मिन लम्बोरिया जैसी कितनी ही बेटियाँ आज हरियाणा का माथा गर्व से ऊँचा कर रही हैं। भारत के खेल इतिहास में हरियाणा के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। कजाकिस्तान में चल रहे World Wrestling Championships 2026 में हरियाणा की बेटी, मनीषा भानवाला ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे यह सम्मान प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला पहलवान हैं।
उन्हें इस स्वर्णिम उपलब्धि के लिए उनको हार्दिक बधाई दी और इस चैंपियनशिप में पदक प्राप्त करने वाली भारत की सभी बेटियों की भी सराहना की। इसी वर्ष हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भी हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते गये 7 स्वर्ण पदकों में से 5 बेटियों के नाम रहे। रेवाड़ी की पैरा खिलाड़ी शर्मिला ढांडा ने स्वर्ण पदक जीतकर सिद्ध कर दिया कि संकल्प अडिग हो तो शारीरिक चुनौती सफलता की राह बहुत देर तक रोक नहीं पाती। उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती ने हर क्षेत्र में प्रतिभाओं को जन्म दिया है। प्रदेश के अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तियों को पद्म सम्मान प्रदान करने का मुझे अवसर प्राप्त हुआ है। इसमें साहित्य, लोककला, समाज सेवा और शिक्षा के साथ-साथ खेल, पैरा तीरंदाजी और विज्ञान क्षेत्रों से जुड़े लोग हैं। प्रतिभा और शौर्य से यह प्रदेश सदा समृद्ध रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में आहुति देने वाली संतानों की जननी इस वीरभूमि ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए भी सदैव बढ़-चढ़कर योगदान किया है। देश की सेना को लगातार समर्पित और साहसी सैनिक देने की परंपरा यहाँ आज भी जीवंत है।
उन्होंने कहा कि अपनी स्थापना के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में आज हरियाणा तेजी से आगे बढ़ रहा है। केन्द्र सरकार के समन्वय से राज्य के विकास को नयी दिशा मिल रही है। हाल ही में जींद-सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन शुरू की गयी है। हाइड्रोजन से चलने वाली यह देश की पहली ट्रेन है। मुझे ज्ञात हुआ है कि हरियाणा में Railway Infrastructure के आधुनिकीकरण में भी महत्वपूर्ण पहलें हुई हैं। खाद्यान्न के क्षेत्र में भी हरियाणा ने देश में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। प्रदेश की खाद्यान्न उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। देश की खाद्य सुरक्षा में प्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा समावेशी विकास की नयी सीढ़ियाँ चढ़ रहा है। गहरी जड़ों वाली अनेक सामाजिक रूढ़ियाँ टूट रही हैं। सर्वांगीण विकास और समझदारी की ये धाराएँ एकरूप होकर ही बढ़नी चाहिएँ। यह विश्व को गीता का संदेश देने वाली धरती है। भगवान श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में ज्ञान और कर्म, शक्ति और करुणा, नेतृत्व और लोककल्याण का आदर्श समन्वय था। उनके व्यक्तित्व और संदेश की प्रेरणा हरियाणा के विकास में सक्रिय हर व्यक्ति और संस्थान को कर्तव्यपालन की शक्ति और समझ दे।



