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चेक गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से भेंट की

नई दिल्ली । चेक गणराज्य की संसद के सीनेट के उपसभापति डॉ. जित्का सेटलोवा के नेतृत्व में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को संसद में राज्य सभा के माननीय उपसभापति, हरिवंश से भेंट की। बैठक के दौरान, हरिवंश ने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध, व्यापार, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डाला।ऐतिहासिक संबंधों पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि वर्ष 1921 और 1926 में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की यात्राओं ने दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और बौद्धिक जुड़ाव की सुदृढ़ नींव रखी। उनकी विरासत को याद रखने के लिए वर्ष 2004 में प्राग में टैगोर की एक आवक्ष मूर्ति लगाई गई और एक सड़क का नाम ‘ठाकुरोवा’ रखा गया। उन्होंने आगे स्मरण किया कि चार्ल्स यूनिवर्सिटी में भारत- विद्या (इंडोलॉजी) विभाग की स्थापना किए जाने से संस्कृति, भाषाओं और साहित्य में हमारी साझी रुचि झलकती है, जो वर्तमान पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।

दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा क्षेत्र में नियमित रूप से बातचीत होती रही है। जनवरी 2024 में, चेक प्रधानमंत्री पेट्र फियाला ने भारत का दौरा किया, जिसके दौरान नवाचार पर रणनीतिक साझेदारी को अपनाया गया।  हरिवंश ने कहा कि इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों को नई तेज़ी मिली। हरिवंश ने व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में उजागर करते हुए संतोष व्यक्त किया कि भारत-चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, दोनों पक्षों को व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए सहयोग करना चाहिए। 2024 में, चेक गणराज्य के साथ द्विपक्षीय व्यापार 4.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

भारत से इस देश को किए जाने वाले निर्यात में स्मार्टफोन, फार्मा उत्पाद, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, कपड़े, जूते और अन्य वस्तुएं शामिल हैं, जिनका मूल्य 3 अरब डॉलर है। चेक गणराज्य के डिजिटल नोमैड कार्यक्रम में भारत को शामिल किये जाने पर आभार व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि यह प्रतिभा गतिशीलता, नवाचार और सहयोग के लिए नए अवसर खोलता है। इससे लोगों के बीच आपसी संबंध और भी अधिक मजबूत होंगे।इस अवसर पर राज्य सभा के माननीय सदस्य श्रीमती महुआ माजी,  रामचंद्र जांगड़ा,  सुमित्रा बाल्मीक और राज्य सभा के महासचिव,  पी. सी. मोदी भी उपस्थित थे।

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