नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बड़ा राजनीतिक और वैचारिक बयान देते हुए राज्य सरकार की रोजगार योजना कर्मश्री का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर शर्म महसूस होती है कि राष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी के नाम को कल्याणकारी योजनाओं से हटाया जा रहा है। ममता बनर्जी का इशारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में किए गए कथित बदलावों की ओर था, जिसे लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कर्मश्री’ योजना के तहत राज्य में 75 से 100 दिनों तक रोजगार दिया जाता है और अब यह योजना महात्मा गांधी के नाम से जानी जाएगी। ममता बनर्जी ने भावुक अंदाज़ में कहा, मैं वास्तव में शर्मिंदा हूं। राष्ट्रपिता का नाम योजनाओं से हटाया जा रहा है। मैं किसी और को दोष नहीं देती, क्योंकि मैं इसी देश की नागरिक हूं। हम राष्ट्रपिता को भूलते जा रहे हैं, यह दुखद है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि अगर केंद्र महात्मा गांधी को सम्मान नहीं देगा तो बंगाल देगा। ममता ने कहा, अगर आप महात्मा गांधी का सम्मान नहीं करेंगे, तो हम करेंगे। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने महात्मा गांधी के साथ-साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, डॉ. भीमराव आंबेडकर, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सरदार पटेल और लाल-बाल-पाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बंगाल की समावेशी संस्कृति की बात करते हुए कहा कि राज्य हर समुदाय और हर विचारधारा का सम्मान करता है। देखा जाये तो यह बयान ऐसे समय आया है जब मनरेगा के नाम और पहचान को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस चल रही है और तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्र सरकार की इतिहास और प्रतीकों को बदलने की राजनीति बता रही है।



