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मनरेगा थी ‘लूट की गारंटी’, जी राम जी में भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं – रिजिजू

लखनऊ । केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना का अभूतपूर्व बताते हुए कहा है कि ‘लूट की गारंटी’ वाले ‘मनरेगा’ के विपरीत जी राम जी कानून में एक रुपये का भी भ्रष्टाचार होने की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उसमें ऐसी व्यवस्था की गयी थी जिसमें कुछ लोग तिकड़म करके करोड़ों रुपये लूट लेते थे। केन्द्रीय मंत्री ने विपक्ष द्वारा मनरेगा को खत्म करके ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना शुरू किये जाने का विरोध करने का जिक्र करते हुए कहा कि दुष्प्रचार करने से कुछ नहीं होगा।

केन्द्रीय मंत्री रिजिजू ने मंगलवार को यहां विकसित भारत-जी राम जी योजना को लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यशाला के बाद प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) में दरअसल ‘लूट की गारंटी’ थी। उन्होंने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब संशोधित नागरिकता कानून लाया गया था, तब कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य पार्टियों ने दुष्प्रचार करके देश भर में मुसलमान को बरगलाने का काम किया कि नागरिकता कानून पारित होने से सारे मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी।

उन्होंने कहा कि ऐसा झूठ फैलाकर गुमराह करने की कोशिश की गयी। जब यह कानून पारित हुआ तो बताइए कि क्या किसी मुसलमान की नागरिकता छीनी गई। विकसित भारत-जी राम जी को लेकर भी ऐसा ही कुछ प्रचार करने की कोशिश की जाएगी। मगर जी राम जी अब कानून बन चुका है और इसे लागू करने की पूरी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बदलाव भी आपको जल्द ही दिखाई देगा।उन्होंने मनरेगा खत्म करके महात्मा गांधी का नाम हटाने की साजिश के आरोप सम्बन्धी एक सवाल पर कहा कि मनरेगा के नाम के पीछे क्यों पड़े हैं? जो भ्रष्टाचार का साधन था, उस पर हम क्यों बात करें? हमको काम देखना है, नाम नहीं।

पुराना कानून ऐसा था कि जिसमें भ्रष्टाचार रोका ही नहीं जा सकता था। रिजिजू ने कहा कि नये कानून में भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है और सारी व्यवस्था डिजिटल की गयी है। उन्होंने कहा कि ‘जोन मैपिंग और सैटेलाइट मैपिंग’ करके विकसित भारत-जी राम जी की हर परियोजना की नीचे से लेकर ऊपर तक निर्धारित मापदंडों के अनुरूप लगातार निगरानी की जाएगी और एक रुपये की भी धांधली नहीं हो सकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा में 11 लाख करोड़ से भी ज्यादा खर्च होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों का अपेक्षित विकास नहीं हुआ। इसके अलावा, मनरेगा के माध्यम से जिस राज्य को जितनी धनराशि की जरूरत होती थी, उतनी नहीं मिल पाती थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नये कानून में 100 दिन की रोजगार गारंटी की अवधि को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।

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