नई दिल्ली । राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन किया। ग्रंथ कुटीर में भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं – तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला में पांडुलिपियों और किताबों का समृद्ध संग्रह है।ग्रंथ कुटीर भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक, दार्शनिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को प्रदर्शित करता है। इस कुटीर में भारत की 11 भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में लगभग 2,300 किताबों का संग्रह है। भारत सरकार ने 3 अक्टूबर, 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।
इससे पहले, छह भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त था। ग्रंथ कुटीर संग्रह में महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान और भक्ति साहित्य जैसे विषयों के साथ-साथ इन भाषाओं में भारत का संविधान भी शामिल है। संग्रह में लगभग 50 पांडुलिपियां भी शामिल हैं। इनमें से कई पांडुलिपियां ताड़ के पत्ते, कागज, छाल और कपड़े जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हाथ से लिखी गई हैं।ग्रंथ कुटीर को केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और देश भर के व्यक्तिगत दानदाताओं के सहयोग से विकसित किया गया है। शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय और उनसे जुड़े संस्थानों ने इस पहल का समर्थन किया है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) पांडुलिपियों के प्रबंधन, संरक्षण, प्रलेखन और प्रदर्शन में पेशेवर विशेषज्ञता प्रदान कर रहा है।
ग्रंथ कुटीर को विकसित करने का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के बारे में नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना है। औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को खत्म करने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत, ग्रंथ कुटीर को प्रमुख रचनाओं के माध्यम से समृद्ध विरासत को दिखाने और विविधता में एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है। ग्रंथ कुटीर ज्ञान भारतम मिशन के विज़न को समर्थन देने का प्रयास है। यह भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने, डिजिटाइज़ करने और फैलाने की राष्ट्रीय पहल है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए परंपरा को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ती है।
पहले, विलियम होगार्थ की मूल रचनाओं की एक कैटलॉग, लॉर्ड कर्जन ऑफ़ केडलस्टन के भाषण, लॉर्ड कर्जन ऑफ़ केडलस्टन के प्रशासन का सारांश, लॉर्ड कर्जन का जीवन, पंच पत्रिकाएँ और अन्य पुस्तकें यहाँ रखी थीं। इन्हें अब राष्ट्रपति भवन परिसर के अंदर अलग स्थान पर ले जाया गया है। ये पुस्तकें अभिलेखीय संग्रह का हिस्सा हैं, उन्हें डिजिटाइज़ किया गया है और शोधकर्ताओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। आगंतुक राष्ट्रपति भवन सर्किट 1 के अपने गाइडेड टूर के दौरान रचनाओं और पांडुलिपियों की झलक देख पाएंगे। साथ ही, लोग संग्रह की जानकारी एक्सेस कर सकते हैं और पुस्तकें और पांडुलिपियाँ पढ़ सकते हैं जो ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध होंगी। शोधकर्ता ग्रंथ कुटीर तक फिजिकल एक्सेस के लिए पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।



