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पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक, रणनीति और सुरक्षा पर हुआ मंथन

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बुधवार शाम को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां मौजूदा स्थिति, भारत के हितों और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई और सुरक्षा पर मंथन किया गया।सर्वदलीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से जुड़े प्रमुख मंत्री मौजूद रहे।

इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री की उपस्थिति को अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री द्वारा पश्चिम एशिया के ताजा हालात पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई है। इसमें क्षेत्रीय तनाव, भारत के रणनीतिक हित, ऊर्जा आपूर्ति और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर जानकारी साझा की गई। सरकार का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को स्थिति से अवगत कराते हुए एक समन्वित राष्ट्रीय दृष्टिकोण तैयार करना है।

सूत्र बताते हैं, कि बैठक में भारत की कूटनीतिक रणनीति, नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई है। गौरतलब है कि विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी।इस अहम बैठक में विपक्ष की ओर से कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, बीजद के सस्मित पात्रा, जेडीयू के ललन सिंह और संजय झा, सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास तथा आम आदमी पार्टी के संजय सिंह शामिल हुए। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक से दूरी बनाई और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए।

प्रधानमंत्री ने इससे पहले राज्यसभा में कहा था कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए सात अधिकार संपन्न समूहों का गठन किया गया है। ये समूह एलपीजी, आवश्यक सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की आपूर्ति पर नजर रखेंगे और समय-समय पर सुझाव देंगे। इस सर्वदलीय बैठक को पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर भारत की नीति तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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