शिमला । गहराते वित्तीय संकट के बीच हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। डगमगाती आर्थिक स्थिति को संभालने और वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए सरकार ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों के वेतन का एक बड़ा हिस्सा अगले छह महीनों के लिए रोकने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी इस अधिसूचना ने प्रशासनिक गलियारों में हडक़ंप मचा दिया है। इससे पहले सरकार ने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में कटौती का फैसला लिया था।
सीएम सुक्खू ने खुद अपनी आधी सैलरी में कटौती की घोषणा की थी।अधिकारियों और कर्मचारियों के सैलरी में कटौती की अधिसूचना मई 2026 से प्रभावी होगी और सरकार का यह कदम अस्थाई होगा। वित्त विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, यह कदम अस्थायी है और वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए सामूहिक प्रयास के रूप में अपनाया जा रहा है। इसे कटौती के रूप में नहीं माना जाएगा और राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति के आधार पर इसे बाद में जारी किया जाएगा।
आईएएस-आईपीएस की सैलरी पर भी कैंची – सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक सिर्फ नेता ही नहीं बल्कि नौकरशाहों के वेतनों में भी कटौती की गई है । जारी आदेश के मुताबिक राज्य के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा रोका जाएगा, जबकि सचिव, विभागाध्यक्ष, आईजी, डीआईजी, एसपी और वन विभाग के अधिकारियों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थगित रहेगा। यह व्यवस्था अप्रैल 2026 के वेतन से लागू होगी, जिसका भुगतान मई में किया जाएगा । सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वेतन कटौती नहीं बल्कि अस्थायी स्थगन है और रोकी गई राशि भविष्य में वित्तीय स्थिति सुधरने पर जारी की जाएगी। साथ ही यह राशि पेंशन और लीव एनकैशमेंट में भी शामिल होगी।



