HomeNationalSIR को लेकर बार-बार याचिका दायर करने पर नाराज हुई शीर्ष अदालत

SIR को लेकर बार-बार याचिका दायर करने पर नाराज हुई शीर्ष अदालत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी सामने आई। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं और वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से बार-बार एक ही मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह बार-बार एक ही विषय को लेकर याचिकाएं दाखिल करना उचित नहीं है और इससे न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि इस मामले में वे कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सीधे रिपोर्ट प्राप्त करने वाले है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि संबंधित ट्राइब्यूनल और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा आवश्यक है, क्योंकि याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि ट्राइब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहा है।याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित अपीलेट ट्राइब्यूनल लोगों को प्रभावी राहत नहीं दे रहा है। आरोप लगाया गया कि कई मामलों में वकीलों को पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है और केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार हो रहे हैं, जबकि फिजिकल आवेदन नहीं लिए जा रहे। यह भी कहा गया कि ट्राइब्यूनल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा है, जिससे प्रभावित लोगों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि जिन मतदाताओं के नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए हैं, यदि उनकी अपील का निपटारा मतदान से पहले हो जाता है तो उन्हें वोट डालने का अधिकार दिया जाएगा। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया था कि वह संशोधित पूरक मतदाता सूची जारी करे और जिनके नाम अपीलेट ट्राइब्यूनल द्वारा बहाल किए गए हैं, उन्हें शामिल करे। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं और लाखों नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बना हुआ है। विशेष रूप से मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में बड़ी संख्या में नाम कटने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई और ट्राइब्यूनल की कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इससे हजारों मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

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