नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम द्वारा एक देश, एक चुनाव के विरोध पर तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने तर्क दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव पहले एक साथ ही होते थे, लेकिन तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस ने असंवैधानिक तरीकों से व्यवस्था को बिगाड़ दिया। इससे पहले, चिदंबरम ने एक देश, एक चुनाव को संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन बताकर कहा था कि इस 2029 में लागू करना संभव नहीं होगा। उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष अपनी बात रखी थी।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 1970 के दशक में विपक्ष की चुनी हुई सरकारों को गिराकर इस सुचारु व्यवस्था को खत्म किया गया था।उन्होंने कहा, लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव पहले एक साथ ही होते थे, ऐसा 1952, 1957, 1962 और 1967 में हुआ था। बाद में, कांग्रेस पार्टी ने असंवैधानिक साजिशें रचकर इस व्यवस्था को बिगाड़ दिया। उन्होंने चिदंबरम के किस अंतरात्मा की बात वाले बयान पर भी सवाल उठाया।एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव का समर्थन कर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लॉ कमीशन ने 1983 और 2018 में, साथ ही पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति ने भी एक साथ चुनाव कराने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।
उन्होंने सवाल किया कि जब इन प्रतिष्ठित निकायों ने जरूरी बताया है, तब यह असंवैधानिक कैसे हो गया? यह प्रस्ताव लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने और उसके बाद 100 दिनों के भीतर अन्य चुनाव कराने का सुझाव देता है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि देश भर में बार-बार होने वाले चुनावों से चुने हुए नेता विकास कार्यों पर पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे सरकार और राजनीतिक दलों का खर्च भी बढ़ता है, और शिक्षक, पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी जैसे जनसेवक चुनाव तैयारियों में ही उलझे रहते हैं, जबकि उन्हें जनसेवा, कल्याण और विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि एक देश, एक चुनाव राष्ट्रीय हित में है और मोटे तौर पर जनता के बीच भी इस पर व्यापक सहमति है।



