नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने या देश के विकास में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर युवाओं की ऊर्जा को अराजकता की ओर मोड़ने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए और जनमत का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।रक्षा मंत्री राजनाथ ने दिल्ली में हालिया विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध के जरिए देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की चर्चा को भी विपक्ष का निंदनीय प्रयास बताया। रक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भी गौर करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका की समीक्षा करनी चाहिए।
कांग्रेस के शासनकाल पर उठाए सवाल – रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल की तीन घटनाओं का उल्लेख करते हुए आपातकाल, 1984 के सिख-विरोधी दंगों और 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाने की घटना को लेकर पार्टी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र को कमजोर किया गया। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर संविधान का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित किया गया था। उन्होंने 1993 में चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से नवीन चावला को हटाने की मांग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर चुनाव आयोग को अपने प्रभाव में रखने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, ये आरोप रक्षा मंत्री के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।
‘वोट चोरी या कामचोरी’, राहुल गांधी से पूछा सवाल – रक्षा मंत्री राजनाथ ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनावों में उसकी हार के पीछे क्या कारण रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के कथित ‘हाइड्रोजन बम’ वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन आरोपों को बड़े खुलासे के रूप में पेश किया गया था, वे उनके मुताबिक प्रभावी साबित नहीं हुए। उन्होंने सामान्य मतदाताओं को फर्जी वोटर बताने के आरोपों पर भी आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री ने चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार की मृत्यु होने पर चुनाव स्थगित करने की परंपरा का जिक्र करते हुए राजीव गांधी की मृत्यु के बाद पूरे देश में चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव स्थगित किया जाना चाहिए था या पूरे देश का।
रक्षा उत्पादन और भारत की वैश्विक साख का उल्लेख – रक्षा मंत्री राजनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ने का दावा किया। उन्होंने डिजिटल लेनदेन, मुक्त व्यापार समझौतों, अंतरिक्ष कार्यक्रम और रक्षा उत्पादन में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और देश रक्षा उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इन उपलब्धियों को स्वीकार नहीं कर पा रहा है और सत्ता हासिल करने के लिए टकराव का रास्ता अपना रहा है। कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई में कथित अंदरूनी खींचतान का उल्लेख करते हुए उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि क्या कांग्रेस समाजवादी पार्टी के सहयोग के बिना रायबरेली की सीट जीत सकती है।



