Health News : वर्तमान समय में कई कारणों से कमर और पीठ में अकड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोग बिस्तर से उठते समय कमर में जकड़न, दर्द और भारीपन महसूस करते हैं, जिससे पूरे दिन की कार्यक्षमता और ऊर्जा प्रभावित होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं है, तो नियमित योगाभ्यास से इस परेशानी में काफी राहत मिल सकती है। केवल 10 से 15 मिनट का योग रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और कमर के तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह की शुरुआत मार्जरी-व्याघ्रासन से करना लाभदायक माना जाता है। इस आसन में हाथों और घुटनों के बल आकर सांस लेते हुए पीठ को नीचे की ओर झुकाया जाता है और सिर ऊपर उठाया जाता है।
इसके बाद सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल बनाकर ठुड्डी को छाती से लगाया जाता है। इस प्रक्रिया को आठ से दस बार दोहराने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है और कमर की जकड़न कम होने लगती है। यह आसन लंबे समय तक बैठे रहने वालों के लिए भी उपयोगी माना जाता है। दूसरा महत्वपूर्ण योगासन भुजंगासन है। इसमें पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखा जाता है और धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर तथा छाती को ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। 15 से 20 सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य अवस्था में लौटना चाहिए। नियमित अभ्यास से पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रीढ़ पर पड़ने वाला तनाव कम हो सकता है। कमर के दर्द और खिंचाव में बालासन भी काफी आराम पहुंचाने वाला योगासन माना जाता है। इसमें घुटनों के बल बैठकर एड़ियों पर शरीर का भार रखा जाता है और आगे झुकते हुए दोनों हाथ सामने की ओर फैलाकर माथा जमीन से लगाया जाता है।
लगभग 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते हुए इस आसन का अभ्यास करने से पीठ और कमर की मांसपेशियों को आराम मिलता है तथा शरीर में तनाव कम होता है।यदि कमर में तेज दर्द, स्लिप डिस्क, हाल ही में सर्जरी, गंभीर चोट, पैरों में सुन्नपन, कमजोरी या कई सप्ताह तक लगातार दर्द बना रहे, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय अस्थि रोग विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच और उपचार कराना जरूरी है। सही शारीरिक मुद्रा अपनाने, नियमित पैदल चलने, पर्याप्त पानी पीने और रोजाना योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से कमर की अकड़न और हल्के बैक पेन से राहत पाने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि योग हमेशा खाली पेट या हल्का नाश्ता करने के कुछ समय बाद करना चाहिए। किसी भी आसन को झटके से करने से बचना चाहिए और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करना चाहिए।



