HomeNationalभारतीय नौसेना को इसी माह मिलेंगे तीन नए स्वदेशी पोत

भारतीय नौसेना को इसी माह मिलेंगे तीन नए स्वदेशी पोत

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना अपनी युद्धक और सामरिक क्षमताओं को एक नया आयाम देने के लिए पूरी तरह तैयार है। जून 2026 में नौसेना एक साथ तीन अत्याधुनिक स्वदेशी प्लेटफॉर्म—आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक—को अपनी सेवा में शामिल करेगी। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्मित ये तीनों पोत नौसेना की परिचालन क्षमता को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचाएंगे। इनका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सर्वेक्षण जैसे तीन अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएंगे। यह कदम आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

आईएनएस दुनागिरी आधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस नीलगिरि श्रेणी का फ्रिगेट है, जिसे प्रोजेक्ट-17ए के तहत विकसित किया गया है। इसकी डिजाइन इस प्रकार बनाई गई है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना अत्यंत कठिन हो। यह जहाज अत्याधुनिक रडार, सेंसर और हथियार प्रणालियों से सुसज्जित है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और क्लोज-इन वेपन सिस्टम जैसी क्षमताएं शामिल हैं। हेलीकॉप्टर संचालन में सक्षम यह शक्तिशाली युद्धपोत लंबे समुद्री अभियानों, एस्कॉर्ट मिशनों और व्यापक समुद्री सुरक्षा कार्यों में अहम भूमिका निभाएगा।वहीं, आईएनएस अग्रय को विशेष रूप से दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। यह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) श्रेणी का पोत है, जो उथले और तटीय समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से संचालन कर सकता है।

इसमें उन्नत सोनार प्रणाली, हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लगाए गए हैं। क्षेत्रीय देशों द्वारा पनडुब्बी बेड़ों के विस्तार को देखते हुए यह क्षमता भारतीय नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।तीसरा महत्वपूर्ण पोत आईएनएस संशोधक एक आधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जहाज है। लगभग 110 मीटर लंबे इस पोत का उपयोग समुद्र तल की मैपिंग, नौवहन मार्गों के सर्वेक्षण और समुद्री आंकड़ों के संग्रह के लिए किया जाएगा। इसमें स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (एयूवी) और दूरस्थ रूप से संचालित अंडरवाटर प्रणालियां (आरओवी) भी मौजूद हैं। यह पोत समुद्री सीमाओं से जुड़े डेटा संग्रह, वैज्ञानिक अनुसंधान, बंदरगाह विकास और आपदा राहत अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान देगा, जिससे सामरिक योजना और समुद्री सुरक्षा को बल मिलेगा।

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