Health News : संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर मोटापा, कब्ज, पाचन संबंधी समस्याएं और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। योग की ऐसी ही एक प्रमुख क्रिया कपालभाति प्राणायाम है, जिसे नियमित रूप से करने पर शरीर और मन दोनों को लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि योग शास्त्रों में कपालभाति को षट्कर्म और प्राणायाम दोनों का हिस्सा माना गया है। इस अभ्यास में व्यक्ति तेजी से सांस बाहर छोड़ता है, जबकि सांस स्वतः भीतर चली जाती है।
माना जाता है कि नियमित अभ्यास से शरीर की सक्रियता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता में सुधार आता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, कपालभाति पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है। इस दौरान पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे आंतों में रक्त संचार बेहतर होता है और पाचन प्रक्रिया को सहयोग मिलता है। नियमित अभ्यास से गैस, कब्ज, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलने की संभावना रहती है। साथ ही भूख में सुधार और शरीर की प्राकृतिक शुद्धिकरण प्रक्रिया को भी बढ़ावा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कपालभाति केवल पाचन तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इस अभ्यास के दौरान फेफड़ों से हवा तेजी से बाहर निकलती है, जिससे श्वसन तंत्र अधिक सक्रिय होता है। इससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होने में सहायता मिल सकती है, जिसके परिणाम स्वरूप याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में सुधार महसूस हो सकता है। नियमित अभ्यास तनाव, चिंता और बेचैनी को कम करने में भी मददगार माना जाता है। इसके अलावा, कपालभाति शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में भी सहायक माना जाता है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित अभ्यास शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को समर्थन दे सकता है, जिससे सामान्य वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी समस्याओं से बचाव में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह किसी बीमारी का उपचार नहीं है और इसे स्वस्थ जीवनशैली के एक हिस्से के रूप में अपनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि कपालभाति हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं है। उच्च रक्तचाप, गंभीर हृदय रोग, हर्निया या हाल ही में पेट की बड़ी सर्जरी कराने वाले लोगों को यह अभ्यास बिना चिकित्सकीय या योग विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। इसी तरह गर्भवती महिलाओं तथा मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को भी कपालभाति करने से बचने की सलाह दी जाती है।



