नई दिल्ली । अगर आप ट्रैफिक चालान को नजरअंदाज करते हैं और सोचते हैं कि बाद में देख देख लिया जाएगा, तब सावधान हो जाइए। केंद्र जल्द ही मोटर व्हीकल नियमों में बड़े और सख्त बदलाव करने वाली है, इसके तहत चालान न भरने पर आपकी गाड़ी की आरसी कैंसिल और ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। सड़क परिवहन मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने इस लेकर एक ड्रॉफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किया है, जिस पर राज्यों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। नए प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, ट्रैफिक चालान 15 दिन के अंदर हाथों-हाथ या 3 दिन के अंदर ऑनलाइन (ई-चालान) भेजा जाएगा। चालान मिलने के बाद वाहन मालिक या ड्राइवर के पास 45 दिन का समय होगा या तब चालान की रकम जमा करें या फिर दस्तावेजों के साथ चालान को ऑनलाइन चुनौती दें। अगर तय समय में ना भुगतान हुआ और ना ही आपत्ति दर्ज की, तब चालान को स्वतः स्वीकार माना जाएगा।
ड्रॉफ्ट नियमों में सबसे सख्त प्रावधान यह है कि जिन लोगों पर बकाया चालान होगा, उनके लिए आरटीओ से जुड़ी सभी सेवाएं बंद होगी। इसतरह वाहन और लाइसेंस को वाहन और सारथी पोर्टल पर नॉट टू बी ट्रॉन्जैक्टेड मार्क कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आरसी रिन्यू नहीं होगी। लाइसेंस रिन्यू या अपडेट नहीं होगा। एड्रेस चेंज, ट्रांसफर जैसी कोई सेवा नहीं मिलेगी और जब तक चालान क्लियर नहीं होगा, कोई काम नहीं होगा।उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने इस नियम को लेकर पहले ही सख्ती शुरू हो चुकी है। यूपी में 5,000 करोड़ से ज्यादा के चालान लंबित हैं। 3,01,410 वाहन और 58,893 लाइसेंस होल्डर चिन्हित किए गए हैं। खास बात यह है कि 5 या उससे ज्यादा अनपेड चालान वाले वाहनों की आरसी ब्लैकलिस्ट की जाएगी, जिससे सड़क पर गाड़ी चलाना गैरकानूनी हो जाएगा।
नए नियमों में रीपीट ट्रैफिक ऑफेंडर्स के लिए भी कड़ी सजा तय की गई है। 3 महीने तक चालान नहीं भरा, तब लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। अगर एक ही साल में 3 से ज्यादा रेड लाइट या खतरनाक ड्राइविंग के कारण चालान कटते हैं, तब करीब 3 महीने तक लाइसेंस जब्त हो सकता है। केंद्र सरकार का साफ मकसद है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर लगाम लगाना जरुरी है।बात दें कि वर्तमान में देशभर में चालान वसूली बेहद कम है। आंकड़ों के अनुसार देश में सिर्फ 40 प्रतिशत चालान ही वसूले जाते हैं। दिल्ली में सिर्फ 14 प्रतिशत, कर्नाटक में 24 प्रतिशत तमिलनाडु और यूपी में 27 प्रतिशत वसूली की जाती है।
2021 में जहां 67 लाख चालान कटे थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1.36 करोड़ हो गई, लेकिन वसूली सिर्फ 105 करोड़ रही। ऑनलाइन चालान को चुनौती देने का भी मौका मिलेगा। केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी को लगता है कि चालान गलत है, तब वह पोर्टल पर जरूरी दस्तावेजों के साथ तय अथॉरिटी के सामने चालान को चुनौती दे सकता है। केंद्र सरकार का मानना है कि लोग जानबूझकर चालान नहीं भरते। कोर्ट में जुर्माना कम हो जाएगा, इस उम्मीद में मामला टालते रहते हैं। आरसी और लाइसेंस को चालान से जोड़कर सरकार अब स्वैच्छिक पालन से आगे बढ़कर जबरन जवाबदेही लागू करना चाहती है।



