नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में अभी भले ही छह महीने का समय बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। चुनाव नजदीक आते ही राज्यों में सियासी सरगर्मी काफी बढ़ गई है और सभी दल सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए नए सामाजिक समीकरण साधने और पुराने सहयोगियों को साथ लाने की जुगत में जुट गए हैं। इन पांच राज्यों में से चार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता संभाल रही है।
पंजाब में सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर उपजी कड़वाहट के बाद एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच नजदीकियों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी को दोबारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल करने के प्रयास में है। इसी कड़ी में अकाली दल प्रमुख की संसद में प्रधानमंत्री से मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके अलावा अकाली दल ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को राज्यों की सीटों में समान बढ़ोतरी के साथ जल्द पारित करने की मांग भी उठाई है।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मैदान में भी उथल-पुथल जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लगातार युवाओं के मुद्दों, जैसे शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति और रोजगार की कमी को लेकर मुखर हैं और युवा वर्ग से जुडऩे की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी गठबंधन के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी ने राज्य के प्रभावशाली ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए नई रणनीति बनाई है। पार्टी ने अपनी सामाजिक समीकरण की परिभाषा में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें पिछड़ों के साथ-साथ पंडित समुदाय को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। माना जा रहा है कि अन्य राज्यों के उप-चुनावों के परिणामों से उत्साहित होकर सपा यह कदम उठा रही है।
दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख ने भी सियासी पिच पर अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी दलों की रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि ब्राह्मण समुदाय में उनकी पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के बयानों की आलोचना की और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह सकारात्मक कार्रवाई और सामाजिक न्याय के पक्ष को न्यायालयों में मजबूती से रखे। कुल मिलाकर, इन पांच राज्यों के आगामी चुनावों को लेकर सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है ।



