नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क एवं हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने, बिजली की उपलब्धता बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। परियोजनाओं में लेह एयरपोर्ट का नया यात्री टर्मिनल, 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दरचा सड़क, नौ मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और बिजली ट्रांसमिशन लाइन प्रमुख हैं।इसके अलावा, सिंधु घाट पर देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क विकसित करने तथा 40 गांवों में जलाशय बनाने की परियोजनाएं भी शामिल हैं। इनसे दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले लद्दाख में विकास कार्यों को गति मिलने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं मजबूत होने की उम्मीद है।
लंबी सड़क से बढ़ेगी कनेक्टिविटी – निम्मू-पदुम-दरचा सड़क परियोजना लद्दाख में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 298 किलोमीटर लंबी यह सड़क क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच आवागमन को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगी। वहीं, लेह एयरपोर्ट के नए यात्री टर्मिनल से हवाई यात्रा से जुड़ी सुविधाओं को विस्तार मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क और हवाई संपर्क से स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी लाभ मिल सकता है।
जलाशयों से किसानों को मिलेगा लाभ – जल संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट अमृत हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 जलाशय बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य उपलब्ध पानी को संग्रहित कर जरूरत के समय इस्तेमाल करना है। लद्दाख में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सालभर पानी की उपलब्धता एक समान नहीं रहती। बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से कुछ समय पर्याप्त पानी मिलता है, लेकिन खेती के लिए जरूरी बुवाई के दौरान कई क्षेत्रों में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में जलाशयों में पानी जमा करने से सिंचाई की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने और उनकी आजीविका को सहारा देने में सहायता मिल सकती है। जल संग्रहण की व्यवस्था क्षेत्र में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क से बचेगी प्राचीन विरासत – लेह के सिंधु घाट पर प्रस्तावित पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्देश्य प्राचीन शैलचित्रों और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों को संरक्षित करना है। लद्दाख में अनेक स्थानों पर चट्टानों पर मनुष्यों, वन्यजीवों और विभिन्न प्रतीकों की आकृतियां उकेरी गई हैं। ये कलाकृतियां क्षेत्र के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और मानव जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। संरक्षण पार्क के माध्यम से इन ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान से बचाने और उनके महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने में मदद मिलेगी। इससे सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बिजली उत्पादन और आपूर्ति होगी मजबूत – लद्दाख में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नौ मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन भी परियोजनाओं में शामिल हैं। जलविद्युत परियोजना से स्थानीय जल संसाधनों के जरिए बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जबकि नई ट्रांसमिशन लाइन बिजली आपूर्ति नेटवर्क की क्षमता और विश्वसनीयता बेहतर करने में मदद करेगी। इन परियोजनाओं के जरिए लद्दाख में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ जल संरक्षण, ऊर्जा उपलब्धता और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर दिया गया है। इनके प्रभावी संचालन से स्थानीय आबादी, किसानों और पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।



