HomePunjabपंजाब की स्वास्थ्य क्रांति ने बेहतर इलाज सुविधाएं गरीबों के घरों तक पहुंचाईं - स्वास्थ्य मंत्री

पंजाब की स्वास्थ्य क्रांति ने बेहतर इलाज सुविधाएं गरीबों के घरों तक पहुंचाईं – स्वास्थ्य मंत्री

पटियाला : एक शानदार उपलब्धि  हासिल करते हुए सरकारी राजिंद्रा हॉस्पिटल के बाल शल्य चिकित्सा विभाग ने गंभीर जन्मजात विकार के साथ पैदा हुई एक दिन की नवजात बच्ची की सफलतापूर्वक जान बचाई है। यह जानकारी देते हुए पंजाब के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ  बलबीर सिंह ने बताया कि बच्ची का पूरा इलाज मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत निशुल्क किया गया है।यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित  करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब में आई स्वास्थ्य क्रांति के चलते राज्य के सरकारी अस्पताल लोगों को उनके घरों के नजदीक ही निजी अस्पतालों से बेहतर और मुफ्त इलाज प्रदान कर रहे हैं।

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि यह सफल सर्जरी राजिंदरा अस्पताल में जटिल नवजात सर्जिकल इमरजेंसी मामलों को संभालने के लिए पंजाब सरकार द्वारा गठित बहु-अनुशासनिक टीम की विशेषज्ञता और समर्पण को दर्शाती है।स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 20 अप्रैल 2026 की रात को राजिंदरा अस्पताल में बड़े ऑपरेशन के जरिए 2 किलो 100 ग्राम वजन की बच्ची का जन्म हुआ। बच्ची के माता-पिता करण कुमार और नेहा राजपुरा शहर के निवासी हैं। करण कुमार मोबाइल रिपेयर का काम करते हैं और उनके दो बच्चों की पहले गर्भावस्था के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए इस बच्ची का जन्म उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

उन्होंने बताया कि जन्म के बाद डॉक्टरों ने पाया कि बच्ची की भोजन नली का एक लंबा हिस्सा विकसित ही नहीं हुआ था, जिसके कारण वह दूध और लार निगल नहीं पा रही थी। इससे उसे छाती में संक्रमण और जान  का खतरा पैदा हो गया था।डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस दौरान बाल शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ. रवि गर्ग और उनकी टीम के सदस्य डॉ. तेग रबाब सिंह,  डॉ. सुकृत सिंह शाह तथा एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. त्रिपत कौर बिंद्रा और डॉ. सुमित सोनी की टीम ने बच्ची की सफल सर्जरी की। डॉ. रवि गर्ग ने ऑपरेशन के दौरान भोजन नली का एक हिस्सा गले में खोल दिया ताकि लार बाहर निकल सके तथा बच्ची के पेट में एक ट्यूब डाली गई, जिसके माध्यम से उसे दूध दिया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह जन्मजात विकार भारत में प्रत्येक 4500 नवजात बच्चों में से एक में पाया जाता है और देश में इस प्रकार के केवल 40 प्रतिशत बच्चे ही बच पाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी राजिंदरा  अस्पताल में कई वर्षों बाद पहली बार इस तरह के दुर्लभ विकार का सफल ऑपरेशन कर इलाज किया गया है, जिसका श्रेय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और अस्पताल के डॉक्टरों को जाता है।डॉ. बलबीर सिंह ने आगे बताया  कि ऑपरेशन के बाद बच्ची 26 दिनों तक नीकू आईसीयू में भर्ती रही। उन्होंने कहा कि पटियाला के अलावा यह ऑपरेशन केवल सरकारी मेडिकल कॉलेज फरीदकोट में ही किया जाता है। जबकि निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन और इतने दिनों तक नीकू में भर्ती रखने का खर्च कम से कम 12 से 15 लाख रुपये तक आता है, लेकिन पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत यह पूरा इलाज बिल्कुल मुफ्त किया गया। बच्ची के माता-पिता ने भावुक होकर पंजाब सरकार, स्वास्थ्य मंत्री और डॉक्टरों का धन्यवाद किया। इस मौके मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विशाल चोपड़ा सहित अन्य डॉक्टर भी मौजूद थे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments