HomeNationalसड़कों पर आवारा पशु मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त:राज्यों को प्रभावी नीति...

सड़कों पर आवारा पशु मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त:राज्यों को प्रभावी नीति बनाने के निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूम रहे आवारा पशुओं से होने वाले हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए मुआवजा देने की स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए। अदालत ने केंद्र और राज्यों से मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए समन्वित नीति तैयार करने का भी आग्रह किया। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि आवारा मवेशी राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और गलियों में मनमाने ढंग से खड़े किए गए प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर नहीं हैं।

अदालत ने कहा कि आवारा पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं अब अपवाद नहीं, बल्कि गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन चुकी हैं, जो मनुष्यों के साथ-साथ स्वयं पशुओं के जीवन के लिए भी खतरा हैं। पीठ ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हाल के वर्षों में हर वर्ष 1,300 से अधिक लोगों की मौत पशुओं के हमलों या उनसे जुड़े हादसों में हुई है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 48 और अनुच्छेद 51(क)(ग), पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशु अतिक्रमण अधिनियम, 1871 तथा विभिन्न राज्यों के पशु संरक्षण कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है।अदालत ने कहा कि जब पशु आर्थिक रूप से उपयोगी नहीं रह जाते, तो उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जो इस समस्या का प्रमुख कारण है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पशुपालकों की जिम्मेदारी है कि वे पशुओं की जीवनभर देखभाल करें।

यदि ऐसा संभव न हो तो उन्हें अधिकृत गौशालाओं या आश्रय स्थलों में सौंपें, न कि खुले में छोड़ दें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। इनमें मवेशियों से जुड़े कानूनों का सख्ती से पालन, आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में मुआवजा नीति, सभी मवेशियों की अनिवार्य टैगिंग, पशुओं के आश्रय स्थलों का डिजिटल रिकॉर्ड तथा प्रत्येक नगर निगम या संबंधित विभाग में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति शामिल है।यह फैसला वर्ष 2007 में पंजाब के संगरूर में एक आवारा सांड के हमले में विजय कुमार की मृत्यु से जुड़े मामले में आया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए मृतक की पत्नी को चार सप्ताह के भीतर 15 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का निर्देश दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य के मामलों में सामान्य नजीर नहीं माना जाएगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments