नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायालय के हस्तक्षेप की सीमाएं निर्धारित हैं और इस चरण में अदालत चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती।सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उसने याचिकाकर्ता की सभी दलीलों पर विचार किया है। याचिका में दावा किया गया था कि रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) ने यह कहते हुए नामांकन खारिज कर दिया कि उम्मीदवार ने अधूरा फॉर्म भरा तथा अपने खिलाफ लंबित शिकायत मामले की जानकारी नहीं दी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित मामले में न तो आरोप तय हुए थे और न ही अदालत ने संज्ञान लिया था, इसलिए ऐसी जानकारी न देने के आधार पर नामांकन रद्द करना मनमाना और अवैध है।सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि आरओ के आदेश के खिलाफ निर्वाचन आयोग का रुख किया गया था। याचिकाकर्ता ने लिखित आवेदन देने के साथ आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष भी रखा, लेकिन आयोग ने कोई आदेश पारित नहीं किया।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से संविधान के अनुच्छेद 329(बी) तथा पूर्व के न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि उनकी याचिका का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जारी रखना है। वहीं निर्वाचन आयोग और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने याचिका की ग्राह्यता पर ही प्रश्न उठाया। उनका तर्क था कि चुनाव लड़ना मौलिक नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है और नामांकन रद्द होने की स्थिति में एकमात्र कानूनी उपाय चुनाव याचिका दायर करना होता है।
मामले की पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट का चुनाव है।



