नशा मुक्त समाज के लिए परिवार, विद्यालय और पूरे समाज को मिलकर करना होगा प्रयास : प्रशासक कटारिया
चंडीगढ़- पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने आज सेक्टर-18 स्थित पीएम श्री गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पंजाब लिट फाउंडेशन तथा शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आयोजित ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ कार्यशाला में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने माताओं से नशे के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि मां और बच्चे के बीच का मजबूत भावनात्मक रिश्ता बच्चों को सामाजिक बुराइयों और नशे की लत से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, धार्मिक संगठनों और पूरे समाज से भी युवाओं को नशे की बुराई से बचाने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। कार्यशाला में शिक्षा सचिव सुश्री प्रेरणा पुरी, स्कूल शिक्षा निदेशक नितीश सिंगला, माताएं, शिक्षक, विद्यार्थी तथा चंडीगढ़ प्रशासन के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
पंजाब लिट फाउंडेशन के सह-संस्थापक खुशवंत सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रशासक ने कहा कि इस अभियान का केंद्र माताओं को बनाना एक “मास्टरस्ट्रोक” है, क्योंकि मां और बच्चे से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं होता। उन्होंने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के अपने दौरों के दौरान माताओं से हुई मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी चिंता और उनके साथ उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव उन्हें इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है, ताकि बच्चों को समय रहते नशे की गिरफ्त में जाने से बचाया जा सके।
कटारिया ने कहा कि पंजाब श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, मदन लाल ढींगरा, शहीद ऊधम सिंह और शहीद भगत सिंह जैसी महान विभूतियों की वीरता, त्याग और देशभक्ति की गौरवशाली धरती है।
उन्होंने कहा कि जिस भूमि ने देश को इतने वीर सपूत दिए हैं, उसके युवा नशे की चपेट में नहीं आने चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और नशा इस अमूल्य शक्ति को कमजोर कर रहा है। इसलिए समाज को मिलकर नई पीढ़ी की रक्षा करनी होगी।सीमापार से हो रही नशीले पदार्थों की तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासक ने कहा कि देश विरोधी ताकतें विशेष रूप से पंजाब के माध्यम से नशे के जरिए भारत के युवाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक संगठनों और पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों के साथ मित्रवत और विश्वासपूर्ण संबंध बनाने का आग्रह किया ताकि वे उनकी समस्याओं को समझ सकें और समय पर उनका मार्गदर्शन कर सकें।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे में असीम संभावनाएं होती हैं और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर का जीवन इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और शिक्षा के बल पर हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। खुशवंत सिंह ने बताया कि शुरुआत में यह अभियान कक्षा आठ और उससे ऊपर के विद्यार्थियों की माताओं पर केंद्रित था। लेकिन विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि अभियान का मुख्य फोकस कक्षा तीन से पढ़ने वाले बच्चों की माताओं पर किया जाए। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में मां और बच्चे का रिश्ता सबसे मजबूत होता है। यही वह समय है जब बच्चों में अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
इसी सोच के तहत इस कार्यशाला का आयोजन छोटे बच्चों की माताओं को जागरूक करने के उद्देश्य से किया गया, ताकि बच्चों के नकारात्मक प्रभावों की चपेट में आने से पहले ही उन्हें सही मार्गदर्शन मिल सके। उन्होंने कहा कि हालांकि अब अभियान का मुख्य फोकस छोटे बच्चों की माताएं हैं, लेकिन बड़े बच्चों की माताओं को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है।कार्यशाला के दौरान पंजाब लिट फाउंडेशन से जुड़े गौरव गिल ने संवादात्मक सत्र में अभिभावकों को बच्चों के साथ मजबूत भावनात्मक संबंध बनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विश्वास, खुला संवाद और बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना उन्हें नशे सहित अन्य सामाजिक बुराइयों से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने अभिभावकों से बिना किसी पूर्वाग्रह के बच्चों की बात सुनने, उनकी भावनाओं और समस्याओं को समझने तथा ऐसा पारिवारिक वातावरण बनाने का आग्रह किया, जहां बच्चे खुलकर अपनी बातें साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि मजबूत पारिवारिक संबंध हर सामाजिक बुराई के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच हैं। अंत में कटारिया ने आह्वान किया कि चंडीगढ़ के सभी शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि नशा मुक्त समाज का संदेश प्रत्येक विद्यार्थी और प्रत्येक परिवार तक पहुंच सके।



