नई दिल्ली। यहां आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया गया, जिसने आतंकवाद, वैश्विक शासन सुधार और मध्य-पूर्व संकट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों का साझा रुख प्रस्तुत किया। इस घोषणापत्र को भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर साझा सहमति बनाना कठिन माना जा रहा था।घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। ब्रिक्स ने देश-समर्थित सीमा पार आतंकवाद, इसकी फंडिंग और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। चीन और रूस जैसे देशों की मौजूदगी में किसी विशिष्ट आतंकी घटना का नाम शामिल करना और सीमा पार आतंकवाद पर सीधा रुख अपनाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, जो आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंडों को अस्वीकार करता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की मांग को दोहराते हुए ब्रिक्स देशों ने इसे अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधि और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। चीन और रूस ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका और आकांक्षाओं के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। चीन का पहले यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध करना और अब इस पर सहमति जताना, भारत की दीर्घकालिक कोशिशों को रणनीतिक बल प्रदान करता है। गाजा संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए घोषणापत्र में बिना बाधा मानवीय सहायता पहुंचाने और स्थायी युद्धविराम की मांग की गई। घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ, व्यापार बाधाओं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया गया। यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म जैसे ग्रीन-टैक्स उपायों को संरक्षणवाद करार दिया गया।
इसके अतिरिक्त, ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन में तत्काल सुधार और उसके ठप पड़े विवाद निपटान तंत्र की बहाली की मांग की, जो नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। सदस्य देशों ने आपस में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणालियों के बीच इंटर-कनेक्शन विकसित करने पर सहमति जताई, जिससे अमेरिकी डॉलर पर वैश्विक निर्भरता कम होगी। भारत के गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी आईएफएससी में ब्रिक्स रिस्क लैब स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया गया, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शासन पर भारत की पहल एआई इंपैक्ट समिट की सराहना की गई, जो भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत स्थिति में रखता है। घोषणापत्र में शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया गया।



