मुम्बई । भारतीय टीम में शामिल हर क्रिकेटर का सपना है होता है कि वह विश्वकप में खेले और विजेता टीम का हिस्सा बने पर कई क्रिकेटर इस मामले में खुशनसीब नहीं रहे। ईशांत शर्मा, इरफान पठान, वीवीएस लक्ष्मग से लेकर अंबाती रायुडू और पार्थिव पटेल ऐसे क्रिकेटर रहे हैं जिन्हें अच्छे प्रदर्शन के बाद भी विश्वकप टीम में कभी अवसर नहीं मिला।इस सूची में पहला नाम तेज गेंदबाज इशांत शर्मा का है। अपनी शुरुआती रफ्तार और घातक स्विंग से उन्होंने बल्लेबाजों को खूब परेशान किया और उन्हें देखकर लगता था कि वे एकदिवसय क्रिकेट के बड़े खिलाड़ी बनेंगे। लेकिन किस्मत ने कभी उन्हें विश्व कप खेलने का मौका नहीं दिया।
अपने एकदिवसय करियर के दूसरे हिस्से में इशांत काफी महंगे साबित होने लगे, जिससे टीम में उनकी जगह पर सवाल उठने लगे। साल 2015 के विश्व कप में उन्हें टीम में चुने जाने का पूरा मौका था, लेकिन ऐन वक्त पर लगी चोट उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुई, जिसने उन्हें विश्व कप से बाहर कर दिया। 100 से अधिक टेस्ट मैच खेलने और 115 एकदिवसीय विकेट लेने के बावजूद, विश्व कप में वह नहीं खेल पाये।इरफान पठान भी ऐसे ही क्रिकेटर रहे। भारतीय टीम में अपने शुरुआती दिनों में इरफान नई गेंद से दुनिया के सबसे खतरनाक स्विंग गेंदबाजों में से एक थे, उन्होंने टेस्ट मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने का कारनामा भी किया था। लेकिन, ऑलराउंडर बनने के प्रयास और बार-बार चोटिल होने की वजह से उनकी गेंदबाजी की चमक कम हो गई। वे 2007 के विश्व कप की भारतीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन भारत के शुरुआती दौर में ही बाहर होने के बावजूद, उन्हें उन 3 मैचों में से एक में भी अंतिम इलेवन में शामिल नहीं किया गया।
वहीं साल 2019 के विश्व कप में अंबाती रायुडू को अंतिम समय में टीम से बाहर कर दिया गया। रायुडू मध्य क्रम के बेहतरीन बल्लेबाज थे, उनका 47 से अधिक का एकदिवसीय बल्लेबाजी औसत था पर चयनकर्ताओं ने उनकी जगह विजय शंकर को शामिल कर लिया जिसकी काफी लोचना हुई। विश्व कप टीम से बाहर होने के बाद निराशा में रायुडू ने संन्यास की घोषणा कर दी थी। उन्होंने अपने वनडे करियर में 3 शतकों के साथ 1694 रन बनाए, लेकिन विश्व कप खेलने का उनका सपना अधूरा ही रह गया।पार्थिव पटेल एक ऐसे बाएं हाथ के बल्लेबाज और विकेटकीपर थे पर उस समय टीम में विकेटकीपरों के लिए काफी प्रतिस्पर्घ थी। राहुल द्रविड़, दिनेश कार्तिक और फिर महेन्द्र धोनी के आने से पार्थिव का करियर लंबा नहीं चला। पार्थिव को 2003 के विश्व कप टीम में चुना तो गया था पर अंत समय पर कप्तान सौरव गांगुली ने राहुल द्रविड़ से विकेटकीपिंग कराने का फैसला किया। इस वजह से पार्थिव पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ बेंच पर बैठे रहे।
इसके बाद एमएस धोनी के आने से पार्थिव के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए। उन्होंने 38 वनडे मैचों में 736 रन बनाए, लेकिन कभी विश्व कप के मैदान पर नहीं उतर सके।इस सूची में सबसे बड़ा नाम महान बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण का है। लक्ष्मण टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक हैं, जिन्होंने 130 से ज्यादा टेस्ट मैचों में 8000 से अधिक रन बनाए पर एकदिवसी क्रिकेट में उनका प्रभाव कम रहा। साल 2003 के विश्व कप में लक्ष्मण का चुना जाना लगभग पक्का था पर चयन समिति ने अंतिम समय पर उनकी जगह दिनेश मोंगिया को टीम में शामिल कर लिया। यह फैसला हर किसी के लिए चौंकाने वाला था। लक्ष्मण ने भारत के लिए 86 वनडे मैच खेले, लेकिन टेस्ट क्रिकेट का यह महान खिलाड़ी कभी विश्व कप का एक भी मैच नहीं खेल पाया। ये पांचों क्रिकेटर अपनी-अपनी प्रतिभा और योगदान के लिए जाने जाते हैं, लेकिन विश्व कप में खेलने का उनका सपना एक पूरा नहीं हो पाया।



