मुम्बई। क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप, टेस्ट मैच में कप्तानी और बल्लेबाजी का संतुलन बनाए रखना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन कुछ ऐसे दिग्गज कप्तान हुए हैं, जिन्होंने अपनी टीम की अगुवाई करते हुए बल्ले से भी रनों का अंबार लगाया और एक ही सीरीज में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है, इसमें दो भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर और शुभमन गिल भी शामिल हैं। इस सूची में सबसे ऊपर ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सर डॉन ब्रैडमैन का नाम आता है, जिनके नाम एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड दर्ज है।
सर डॉन ब्रैडमैन ने साल 1936-37 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई 5 मैचों की घरेलू सीरीज में यह महान रिकॉर्ड बनाया था। यह सीरीज उनके लिए कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों की अग्निपरीक्षा थी। ब्रैडमैन ने विरोधी गेंदबाजों को धवस्त करते हुए 9 पारियों में अविश्वसनीय 90.00 की औसत से 810 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 3 शतक और 1 अर्धशतक जड़ा, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 270 रन रहा। भले ही वे दो बार शून्य पर आउट हुए, लेकिन उनकी इस ऐतिहासिक कप्तानी पारी ने ऑस्ट्रेलिया को मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। टेस्ट इतिहास में किसी कप्तान द्वारा एक सीरीज में बनाए गए यह सबसे अधिक रन हैं।
आधुनिक क्रिकेट के उभरते सितारे और भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने भी इसमें अपना नाम दर्ज कराया है। साल 2025 में इंग्लैंड दौरे पर एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के दौरान गिल ने कप्तानी के दबाव को बाहर करते हुए इंग्लैंड की तेज पिचों पर रनों की नई परिभाषा लिखी। 5 मैचों की 10 पारियों में उन्होंने 75.40 की औसत से 754 रन बनाए। इस सीरीज में शुभमन ने कमाल की निरंतरता दिखाते हुए 4 शानदार शतक लगाये, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 269 रन रहा। वे इस सीरीज में एक बार भी बिना खाता खोले आउट नहीं हुए, जो उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रमाण है।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ग्राहम गूच ने साल 1990 में भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज में रनों का पहाड़ खड़ा किया था। यह सीरीज सिर्फ 3 मैचों की थी, लेकिन गूच ने सिर्फ 6 पारियों में ही 125.33 की हैरतअंगेज औसत से 752 रन बनाकर सबको चौंका दिया था। इसी सीरीज में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर गूच ने 333 रनों की मैराथन पारी खेली थी। उन्होंने 3 शतक और 2 अर्धशतक लगाए, जो उनकी अद्भुत कला को दर्शाता है कि कैसे उन्होंने कम मैचों में इतनी बड़ी रन संख्या हासिल की।1985 की एशेज सीरीज में इंग्लैंड के कप्तान डेविड गावर ने अपनी क्लासिक बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को पूरी तरह लाचार कर दिया था। 6 मैचों की 9 पारियों में गावर के बल्ले से 81.33 की औसत से 732 रन निकले। अपनी टीम को फ्रंट से लीड करते हुए गावर ने 3 शतक और 1 अर्धशतक लगाया, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 215 रन रहा।
गावर की इस शानदार कप्तानी पारी की बदौलत इंग्लैंड ने एशेज पर अपना कब्जा जमाया था।वेस्टइंडीज की खूंखार गेंदबाजी के सामने लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर ने भी बतौर कप्तान एक अविस्मरणीय प्रदर्शन किया था। साल 1978-79 में जब वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आई, तो भारतीय कप्तान गावस्कर के सामने दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों की चुनौती थी। बिना हेलमेट के खेलने वाले गावस्कर ने 6 मैचों की 9 पारियों में 1 बार नाबाद रहते हुए 91.50 की प्रभावशाली औसत से 732 रन बनाए। गावस्कर ने इस सीरीज में 4 शतक और 1 अर्धशतक जड़ा, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 205 रन था। विंडीज के पेस अटैक के सामने एक कप्तान के तौर पर ऐसी मजबूत पारी खेलना गावस्कर के फौलादी इरादों को बयां करता है।



