नई दिल्ली। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए विदेश जाने की जरूरत कम पड़ेगी, क्योंकि ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के तीन प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने की मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए लेटर ऑफ अप्रूवल सौंपे गए।यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है।सरकार लंबे समय से दुनिया के शीर्ष शिक्षण संस्थानों को भारत में निवेश और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अब इस दिशा में एक और उपलब्धि हासिल हुई है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंजूरी पाने वाले संस्थानों में ब्रिटेन के दो प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल और यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क अपने कैंपस मुंबई में खोलेंगे। इन विश्वविद्यालयों को रिसर्च, इनोवेशन और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए दुनिया भर में पहचान हासिल है। मुंबई जैसे आर्थिक और शैक्षणिक केंद्र में इन संस्थानों के आने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और रिसर्च का अवसर अपने ही देश में मिलेगा।वहीं ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स को बेंगलुरु में कैंपस लगाने की मंजूरी मिल गई है। बेंगलुरु को देश की टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप राजधानी माना जाता है। ऐसे में यहां विदेशी विश्वविद्यालय का आगमन शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत कर सकता है।



