नई दिल्ली। संसद ने वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सरकार द्वारा किए गए अतिरिक्त व्यय को वैधानिक मंजूरी देते हुए विनियोग (संख्यांक-3) विधेयक पारित कर दिया। राज्यसभा ने गुरुवार को इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दी, जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी। इसके साथ ही सरकार को भारत की संचित निधि से उस अतिरिक्त खर्च के लिए धन निकालने की औपचारिक अनुमति मिल गई, जो संबंधित वित्त वर्ष में संसद द्वारा स्वीकृत राशि से अधिक हुआ था। वहीं मांगो को लेकर विपक्षी सदस्यों ने बहिर्गमन किया।रा
ज्यसभा की कार्यवाही दिन में तीन बार स्थगित होने के बाद अपराह्न लगभग 2:45 बजे दोबारा शुरू हुई। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग (संख्यांक-3) विधेयक सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया।संक्षिप्त चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों ने अर्थव्यवस्था और सरकारी व्यय से जुड़े मुद्दे उठाए। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त अनुदान की मांग 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में हुए अतिरिक्त खर्च को नियमित करने के लिए लाई गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव लोक लेखा समिति (पीएसी) की सिफारिश पर प्रस्तुत किया गया है।
सीतारमण ने यह भी उल्लेख किया कि पीएसी की अध्यक्षता परंपरागत रूप से विपक्ष के सदस्य करते हैं, इसलिए इस प्रक्रिया में संसदीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सांसदों ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग की। इस मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन भी किया। विनियोग विधेयक का उद्देश्य सरकार द्वारा पूर्व में किए गए अतिरिक्त व्यय को संवैधानिक और विधिक स्वीकृति प्रदान करना है। संसदीय मंजूरी के बाद अब वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान स्वीकृत बजट से अधिक किए गए खर्च को औपचारिक रूप से नियमित कर दिया गया है।



