Health News : गर्मियों के दिनों में चिड़चिड़ापन, थकान, डिहाइड्रेशन और नींद की कमी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु को शरीर की ऊर्जा या बल के कम होने का समय माना गया है। ऐसे में अगर हम अपनी जीवनशैली में छोटी-छोटी गलतियां करते हैं, तो ये हमारी सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि मौसम के अनुसार अपनी आदतों को बदला जाए ताकि हम गर्मी के प्रतिकूल प्रभावों से बच सकें। जानकारों का कहना है कि ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की तेज किरणें शरीर से नमी और ताकत दोनों को कम कर देती हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस समय शरीर में पित्त और वात दोष बढ़ने लगते हैं, जिससे कमजोरी और थकावट महसूस होती है।
यदि आप दिनभर धूप में रहते हैं, पर्याप्त पानी नहीं पीते या ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना खाते हैं, तो यह समस्याएं और बढ़ सकती हैं। इस मौसम में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना।दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ और बेल का शरबत जैसे प्राकृतिक पेय लेना फायदेमंद होता है। ये शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं। वहीं, बहुत ज्यादा ठंडे पेय या बर्फ का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है। खाने-पीने की बात करें तो हल्का और सुपाच्य भोजन इस मौसम की सबसे बड़ी जरूरत है। खीरा, तरबूज, ककड़ी, लौकी जैसी पानी से भरपूर सब्जियां और फल शरीर को ठंडा रखते हैं। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और जंक फूड इस समय शरीर में गर्मी बढ़ाता है और पाचन बिगाड़ सकता है। दिनचर्या में भी बदलाव जरूरी है।
आयुर्वेद के अनुसार दोपहर की तेज धूप से बचना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि सुबह या शाम के समय ही बाहर निकलें। ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनना भी शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी से शरीर और ज्यादा थका हुआ महसूस करता है। एक और महत्वपूर्ण बात है मानसिक शांति। गर्मी में अक्सर लोग जल्दी गुस्सा हो जाते हैं या बेचैनी महसूस करते हैं। ऐसे में ध्यान, योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह न केवल शरीर को शांत रखता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। आयुर्वेद में इस ऋतु में ज्यादा मेहनत करने और अत्यधिक व्यायाम से बचने की सलाह दी जाती है।



