मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब और देश की भलाई के लिए भारतीय सेना के साथ मजबूत सहयोग का आह्वान किया
चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सीमा पर सुरक्षा की दूसरी लाइन को मजबूत करने, सशस्त्र बलों में पंजाबियों की भर्ती को बढ़ावा देने और सेवारत सैनिकों तथा पूर्व सैनिकों की भलाई के लिए पंजाब सरकार और भारतीय सेना के बीच और अधिक मजबूत सहयोग का आह्वान किया।
चंडीगढ़ में थल सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) जनरल धीरज सेठ के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा और पंजाब से संबंधित सैन्य मामलों पर भी चर्चा की, जिसमें सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता भी शामिल थी।
इस बैठक की कुछ झलकियाँ साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा: “आज मैंने चंडीगढ़ में भारत के 31वें थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान हमने देश की सुरक्षा और पंजाब से संबंधित सैन्य मामलों पर सार्थक चर्चा की। हमारी सरकार देश की रक्षा करने वाले हमारे बहादुर सैनिकों और पूर्व सैनिकों की भलाई के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इंकलाब जिंदाबाद।”आज बैठक करने आए थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, पी.वी.एस.एम., यू.वाई.एस.एम., ई.वी.एस.एम. के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाबी हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अग्रणी रहे हैं। राज्य सरकार सशस्त्र बलों में पंजाबियों की भर्ती बढ़ाने के लिए पहले से ही अथक प्रयास कर रही है। ‘माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टिट्यूट फॉर गर्ल्स’ और ‘महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टिट्यूट’ के साथ-साथ सी-पाइट केंद्रों का नेटवर्क इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब की पाकिस्तान के साथ 532 किलोमीटर लंबी संवेदनशील सीमा है, जिसके कारण ड्रोनों के माध्यम से होने वाली सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक के साथ-साथ कम ऊंचाई वाले इंटरसेप्टिव रडार समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता हैं। पंजाब, देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने अपनी खुद की एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित की है। मैं पंजाब पुलिस, जो हमेशा सुरक्षा की दूसरी पंक्ति के रूप में काम करती है, द्वारा किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करने के लिए थल सेना प्रमुख के सहयोग की मांग करता हूं।”पूर्व सैनिकों की भलाई के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “राज्य सरकार उन पूर्व सैनिकों को नौकरियां दे रही है जो पेस्को (पंजाब एक्स-सर्विसमैन कॉरपोरेशन) द्वारा रोजगार पर रखे गए हैं और लोगों को शानदार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वाघा, हुसैनीवाला और सादकी सीमा पर होने वाली रिट्रीट रस्में दुनिया भर के बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती हैं। राज्य सरकार ने रोपड़ में अपनी 200 एकड़ जमीन पहले ही भारतीय सेना को दी है, जिसका उपयोग रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सुचारू रूप से किया जा सकता है।”भारतीय सेना को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार इस नेक कार्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसमें कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। अपनी शुरुआत से ही पंजाब देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में सबसे आगे रहा है और इस परंपरा को आगे भी जारी रखा जाएगा। मैं संकट की घड़ी में विशेष रूप से हाल ही में आई बाढ़ के दौरान राज्य के लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने के लिए भारतीय सेना का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं।”
इस दौरान थल सेना प्रमुख ने पंजाब सरकार को देश के निर्माण के प्रति भारतीय सेना की अवधारणा और प्रतिबद्धता का भरोसा दिलाया। उन्होंने पूर्व सैनिकों की भलाई को बढ़ावा देने वाली नीतियों के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद भी किया।इस बैठक ने क्षेत्र में सिविल-मिलिट्री समन्वय (तालमेल और सहयोग) को और मजबूत किया और आंतरिक सुरक्षा, सीमांत शांति, प्राकृतिक आपदाओं के मुकाबले, बाहरी खतरों और अन्य संकटों का संयुक्त रूप से सामना करने के प्रति विश्वास एवं भरोसे को बढ़ाया। इस अवसर पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत, विशेष डी.जी.पी. पी.के. सिन्हा, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पिंदर सिंह (ए.वी.एस.एम, एस.एम.) आर्मी कमांडर वेस्टर्न कमांड, कर्नल जसदीप संधू (सलाहकार, सिविल मिलिट्री मामले) और अन्य भी उपस्थित थे।



