चंडीगढ़- पंजाब के जल संसाधन एवं भूमि व जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने नहरों एवं खालों को बहाल करके तथा टेलों, टिब्बों एवं पहाड़ी क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाकर राज्य की सिंचाई प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। विधायक स. दविंदरजीत सिंह लाडी ढोस द्वारा नहरों एवं खालों की बहाली के लिए पंजाब सरकार के प्रयासों की सराहना करने हेतु प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव पर पंजाब विधानसभा में बोलते हुए जल संसाधन मंत्री ने कहा कि मान सरकार द्वारा ये कदम पंजाब के बहुमूल्य भूजल के संरक्षण तथा राज्य में कृषि के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। यह प्रस्ताव पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया।
प्रस्ताव पर बोलते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब ने कृषि के लिए अपने संसाधनों का बड़े पैमाने पर उपयोग करके देश की खाद्य सुरक्षा में बहुमूल्य योगदान दिया है। हालांकि, भूजल पर लंबे समय से निर्भरता के कारण राज्य के जल संसाधन काफी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मान सरकार ने स्थिति की गंभीरता को पहचाना और पंजाब भर के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाकर नहरी सिंचाई पर निर्भरता बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट रणनीति अपनाई है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सिंचाई के विश्वसनीय साधन सुनिश्चित करने के लिए नहरी नेटवर्क को मजबूत करना और धाराओं को बहाल करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था में एक बड़ी कमी थी। पुरानी व्यवस्था के तहत किसानों को खालों एवं भूमिगत पाइपलाइनों की लागत का 10 प्रतिशत देना पड़ता था, जबकि 90 प्रतिशत खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता था।
कई किसान अपना हिस्सा देने में असमर्थ थे, जिससे कई परियोजनाएं रुक जाती थीं। गोयल ने कहा कि वर्ष 2023 के दौरान मान सरकार ने किसानों द्वारा दिए जाने वाले 10 प्रतिशत योगदान को माफ करके तथा ऐसे कार्यों की पूरी लागत वहन करने का वादा करके एक निर्णायक कदम उठाया। इस फैसले ने बड़ी वित्तीय बाधा को दूर किया और राज्य भर में खालों की बहाली तथा भूमिगत पाइपलाइन बिछाने के कार्य में तेजी लाई। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि इस प्रतिष्ठित अभियान के तहत पंजाब भर में लगभग 19,316 खालों को बहाल किया गया। उन्होंने बताया कि कई धाराएं सरकारी रिकॉर्ड पर तो मौजूद थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर लगभग विलुप्त हो गये थे। सरकार ने स्थानीय लोगों के सहयोग से इन धाराओं को बहाल किया और उन क्षेत्रों में नहरी सिंचाई नेटवर्क को कार्यशील बनाया, जो वर्षों से नहरी पानी से वंचित थे।
सरहाली डिस्ट्रीब्यूटरी का उदाहरण देते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि विभाग द्वारा लगभग छह किलोमीटर लंबी माइनर को बहाल किया गया, जो जमीन के नीचे दब गई थी और लगभग विलुप्त हो गई थी। उन्होंने कहा कि बहाल की गई माइनर अब नौरंगाबाद, कैरों, बनीवाला, जमालपुर, मियांविंड, आसल उताड़, भोरे कोना, सरहाली और नौशहरा पन्नुआं समेत गांवों को पानी की आपूर्ति कर रही है और लगभग 4,737 एकड़ रकबे को सिंचाई सुविधा प्रदान कर रही है। गोयल ने कहा कि सरकार ने सरहिंद फीडर एवं फिरोजपुर फीडर सहित मौजूदा नहरों की क्षमता में भी काफी वृद्धि की है। केवल नई नहरों के निर्माण पर निर्भर रहने के बजाय विभाग ने नहरों को चौड़ा और गहरा करके मौजूदा नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि की है।
उन्होंने कहा कि राज्य की नहरी प्रणाली की क्षमता अब लगभग 36,000 क्यूसेक हो गई है और पानी का प्रवाह लगभग 39,000 क्यूसेक को छू रहा है। उन्होंने कहा कि नहरी नेटवर्क अब कई हिस्सों में अपनी आपूर्ति क्षमता के करीब पानी ले जा रहा है, जिससे सिंचाई के पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब भर में 1,687 स्थानों पर पहली बार नहरी पानी पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से लगभग 45 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया है, जहां नहरी पानी उन क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जो पहले इस सुविधा से वंचित रहे थे।उन्होंने कहा कि नहरी पानी से किसानों और ग्रामीणों को अपार राहत और खुशी मिली है। कई इलाकों में लोगों ने ढोल बजाकर और भांगड़ा डालकर जश्न मनाया।
गोयल ने कहा कि मान सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ऊंचे इलाके सिंचाई नेटवर्क से बाहर न रहें। काठगढ़ में लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत 135 करोड़ रुपये की लागत वाली एक परियोजना शुरू की गई, जिसके तहत लगभग 70 फुट ऊपर स्थित क्षेत्रों में पानी पहुंचाया गया और लगभग 11,737 एकड़ को सिंचाई सुविधा प्रदान की गई। कादियां क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि रिआड़की डिस्ट्रीब्यूटरी को 30.50 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत किया गया। इसकी क्षमता 216 क्यूसेक से बढ़ाकर 385 क्यूसेक की गई और लगभग 5.5 किलोमीटर कंक्रीट लाइनिंग की गई है।उन्होंने कहा कि इस परियोजना से लगभग 43,000 एकड़ तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचा। लगभग 30 गांवों के लोगों ने पहली बार नहरी पानी अपने खेतों तक पहुंचने पर खुशी व्यक्त की।
गोयल ने कहा कि नहरी ढांचे की बहाली के कारण भूजल संरक्षण के मामले में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब के भूजल का आकलन करने के बाद 153 ब्लॉकों में से 74 ब्लॉकों, जो लगभग 48 प्रतिशत बनते हैं, में भूजल की स्थिति में सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि पांच ब्लॉक पानी के गंभीर संकट वाली श्रेणियों से अपेक्षाकृत बेहतर श्रेणियों में शामिल हुए हैं। ये परिणाम दर्शाते हैं कि नहरी सिंचाई के विस्तार और भूजल पर निर्भरता कम करने से राज्य में भूजल की स्थिति में सुधार करने में मदद मिली है।पानी के बंटवारे के मुद्दे पर जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि पंजाब ने देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बहुमूल्य योगदान दिया है और अपने जल संसाधनों की रक्षा करना इसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य उचित अधिकार से अधिक अपने पानी की एक बूंद भी नहीं देगा।
उन्होंने आगे कहा कि पंजाब ने एक आपात स्थिति के दौरान हरियाणा की पानी की मांग का जवाब देते हुए अपनी मानवीय भावना का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि हरियाणा ने पेयजल, पशुधन और थर्मल पावर प्लांटों की आवश्यकताओं का हवाला देते हुए 4,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी और पंजाब ने अपने हिस्से में से यह पानी उपलब्ध करवाया था। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मान सरकार ने केवल पानी के संरक्षण की बात ही नहीं की, बल्कि किसानों तक नहरी सिंचाई की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ढांचा भी तैयार किया है। उन्होंने कहा कि नहरों और खालों की बहाली के साथ-साथ भूमिगत पाइपलाइनों और कंक्रीट लाइनिंग ने राज्य भर में सिंचाई का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।
गोयल ने पंजाब के लोगों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और इसकी बर्बादी रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज पानी का एक गिलास बचाना भी भावी पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।उन्होंने नहरी सिंचाई की बहाली और राज्य भर के खेतों तक पानी पहुंचाने जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम देने के लिए मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान की सराहना की। उन्होंने कहा कि नहरों के टेलों, टिब्बों और पहाड़ी क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाना, पंजाब के भूजल को बचाने और राज्य के कृषि भविष्य की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रस्ताव पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस तथा विधायक लखबीर सिंह राय, जगदीप सिंह काका बराड़, नरिंदरपाल सिंह सवना, मनजिंदर सिंह लालपुरा, मनविंदर सिंह ग्यासपुरा और नरेश कटारिया ने भी अपने विचार साझा किए।



