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पंजाब सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी को और मजबूत करने के लिए शुरू की वीबी जी राम जी योजना

चंडीगढ़ : पंजाब के ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि पंजाब सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के स्थान पर नई लागू की गई वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) योजना में सुचारू बदलाव को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। जिसके तहत ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार के अवसरों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रदेश भर में विकास कार्यों के निर्बाध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया गया है। मंत्री ने कहा कि मनरेगा 30 जून, 2026 तक कार्यशील रही और वीबी जी राम जी योजना 1 जुलाई, 2026 से लागू हो गई है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत वेतन और मजदूरी का पूरा फंड भारत सरकार द्वारा दिया जाता था, जबकि वस्तुओं संबंधी लागत केंद्र और राज्य के बीच 75:25 के अनुपात में साझा की जाती थी।

उन्होंने कहा, “नई योजना के तहत वेतन, मजदूरी और सामग्री की लागत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में साझा की जाएगी। यह योजना काम की तलाश करने वाले प्रत्येक पात्र व्यक्ति को रोजगार की कानूनी गारंटी देती है।”मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि वैध मनरेगा जॉब कार्ड धारक सभी लाभार्थियों को स्वतः ही वीबी जी राम जी के तहत रोजगार प्राप्त होता रहेगा। उन्होंने आगे कहा, “नए लाभार्थी भी इस योजना के तहत नाम पंजीकृत करा सकते हैं और इसके लिए कल से हर ग्राम पंचायत में जॉब कार्ड पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि नए मजदूरों का पंजीकरण किया जा सके और साथ ही मौजूदा लाभार्थियों के विवरणों को अपडेट किया जा सके।”
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि योजना के त्वरित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए विकास कार्यों की पहले ही पहचान करके मंजूरी दे दी गई है।

स्थानीय मजदूरों के साथ विचार-विमर्श करके किसी भी अतिरिक्त काम की पहचान करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं कराई जाएंगी। उन्होंने कहा, “सभी ग्राम पंचायतों में रोजनामचे (मस्टर रोल) जारी किए जा रहे हैं, ताकि वैध जॉब कार्ड वाले मजदूरों को रोजगार के लिए आवेदन देने और कल से ही काम पर जाना सुनिश्चित किया जा सके। मजदूरों की उपस्थिति समर्पित सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल रूप में लगाई जाएगी।”मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि विभाग द्वारा मजदूरों की अदला-बदली के दौरान सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक प्रबंध भी किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पहले लगभग 1200 ग्राम रोजगार सहायक मस्टर रोल जारी करने और उपस्थिति बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा, “वर्तमान स्थिति के मद्देनजर ग्रामीण विकास विभाग की अन्य योजनाओं के लगभग 4000 कर्मचारियों को ये जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और वे पहले ही अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, इसी तरह विभाग के जूनियर इंजीनियरों को तकनीकी सहायकों की जिम्मेदारियां सौंपते हुए एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक्स तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, आवश्यक प्रशिक्षण लेने के बाद ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त स्टाफ भी तैनात किया गया है।”कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई मांगों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा, “2023-नीति के तहत नियमित करने की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह नीति केवल नियमित स्वीकृत पदों के विरुद्ध काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होती है, जबकि मनरेगा कर्मचारी केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत काम करते थे, जो पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना थी।” उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने पहले ही इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव परसोनल विभाग को भेज दिया है। कुछ प्रश्नों के बाद, संशोधित प्रस्ताव विस्तृत टिप्पणियों के साथ फिर से जमा करवा दिया गया है।

मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि विभाग ने कर्मचारियों के वर्तमान वेतन की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत के सामूहिक वृद्धि का प्रस्ताव भी दिया है। उन्होंने कहा, “मनरेगा के तहत पहले के वार्षिक कॉन्ट्रैकी के विपरीत, वीबी जी राम जी के तहत कर्मचारियों को अब अधिक निरंतरता, स्थिरता और नौकरी की सुरक्षा प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि नियमित कर्मचारियों के बराबर संशोधित वेतनमानों की मांग पर नियमित करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विचार किया जा सकता है।”मंत्री ने सभी कर्मचारियों से नई योजना के तहत कर्तव्यों पर वापस आने और बदलाव की अवधि के दौरान ग्रामीण विकास कार्यों के निर्बाध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ पहले ही कई विचार-विमर्श किए जा चुके हैं।

मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने आगे बताया कि तकनीकी सहायकों के वेतन पहले ही मई 2026 तक जारी कर दिए गए हैं, जबकि ग्राम रोजगार सहायकों और अन्य स्टाफ के वेतन जनवरी 2026 तक जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “यह देरी भारत सरकार द्वारा धनराशि को विलंब से जारी करने और बाद में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण हुई थी, लेकिन बिल जमा करवाने के बाद कोषागार के साथ समन्वय करके बकाया बिल मंजूर कर लिए गए थे।”मंत्री ने कहा, “उपयोगिता प्रमाणपत्र और धनराशि संबंधी आगामी मांग पहले ही भारत सरकार को भेज दी गई है, जिसकी अगली किस्त 20 जुलाई के बाद जारी होने की उम्मीद है। भारत सरकार ने वीबी जी राम जी योजना के तहत वेतन के लिए 50 करोड़ रुपये पहले ही मंजूर कर दिए हैं और भविष्य में वेतन जारी करने का काम नियमित रूप से जारी रहेगा।”

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